वक़्त वक़्त की बात: *वक़्त की मार 25 हज़ार का बगला 10 लाख फिर 150 करोड़ रुपयों में बिका* :वक़्त कब किसका पलट जाए कोई नहीं जानता..वक़्त फ़िल्म का एक डायलाॅग है ना..: *"चाय की प्याली हाथ मे उठा कर मुंह तक तक ले जाते-जाते कई बार बरसों बीत जाते है..पोटली रुपयों से भरी हो पर इंसान कभी-कभी भीख मांगने पर मजबूर हो जाता है"* मुम्बई,फिल्मी दुनिया में ये कारनामे अक्सर होते रहते हैं इनमें एक क़िस्सा एक घर का भी है जो अपने आप में इतिहास है। मेरठ से आया एक नौजवान जब बैजू बावरा में तू गंगा की मौज मैं जमुना की धार गीत अपने लहलारते बालों से गाता है तो फ़िल्मी दुनिया में तहलका मचा जाता है और रातों रात स्टार बन जाता है.. मैं भारत भूषण की बात कर रहा हूँ..भारत भूषण जब बुलंदियो पर थे तो जुहू बीच पर एक बंगला खरीदा.. सामने समंदर की लहरें और हवाएं.. सब कुछ सही चल रहा था तब भारत भूषण ने फिल्मों को प्रोड्यूस करने का सोचा बरसात की रात जैसे सुपर हिट फ़िल्म भी बनाई..फिर अगली दो-चार फिल्में नहीं चली, सितारे गर्दिश में आ गए..घाटा हुआ तो क़र्ज़ों के बोझ तले आ गए..अपनी जमा पूंजी बेच कर क़र्ज़े चुकाए जाने लगे जिसमें ये बंगला भी था..उन दिनों एक और स्टार तेज़ी से उभर रहा था। *राजेन्द्र कुमार..* राजेन्द्र कुमार का सितारा बुलंदी पर था तो ये बंगला भारत भूषण से इन्होंने 25 हज़ार रुपये में खरीद लिया..उन दिनों 25 हज़ार बहुत बड़ी रक़म हुआ करती थी..राजेन्द्र कुमार ने उस बंगले के नाम 'डिंपल" रखा जो उनकी बेटी का ही नाम है..बंगले में आने के बाद राजेन्द्र कुमार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते ही गए.. फिर बीच मे राजेन्द्र कुमार का भी सितारा मद्धम हुआ क्योंकि एक और बड़ा स्टार फ़िल्मी दुनिया में छा चुका था..नाम था..! *राजेश खन्ना..* राजेश खन्ना को ये बंगला बड़ा पसंद था पर राजेन्द्र कुमार उसे बेचने के मूड में नहीं थे.. लेकिन एक दिन अचानक राजेन्द्र कुमार को पैसों की ज़रूरत आन पड़ी..उन्होंने राजेश खन्ना को अप्रोच किया लेकिन कीमत इतनीं मांगी कि राजेश खन्ना जैसे स्टार को भी देने में मुश्किल आयी..कीमत थी 10 लाख रुपये.. राजेश खन्ना उन दिनों बड़े स्टार ज़रूर थे लेकिन मेहनताना इतना नहीं मिलता था कि एक साथ पेमेंट कर सकें..राजेश खन्ना को ये बंगला अपने हाथ से फिसलता नज़र आया..तभी एक और दिलचस्प वाक़या हुआ.. दक्षिण के एक बड़े फ़िल्म प्रोड्यूसर चिनप्पा देवर साहब हिंदी में एक फ़िल्म राजेश खन्ना साहब को लेकर बनाना चाह रहे थे..राजेश खन्ना बिज़ी थे अन्य फिल्मों में इसलिए वो इसे करने में आनाकानी कर रहे थे.. लेकिन चिनप्पा देवर साहब कहाँ मानने वाले थे.. राजेश खन्ना ने आख़िर उन्हें टरकाने कें लिये भारी भरकम रकम मांग ली..क़ीमत थी 10 लाख रुपये.. चिनप्पा देवर हैरान थे उस समय कोई भी बड़ा एक्टर 2 से 3 लाख ही लिया करता था राजेश खन्ना ने एक साथ 10 लाख मांगे..और साथ में ये कह दिया कि सारे पैसे एडवांस ही चाहिए क्योंकि मुझे एक बंगला खरीदना है.. चिनप्पा देवर जी ने सारी बात जानी और एक साथ 10 लाख रुपये थमा दिये राजेश खन्ना को..और फ़िल्म शुरू हुई जो सुपर हिट साबित हुई फ़िल्म का नाम था *'हाथी मेरे साथी'...* अब राजेश खन्ना इस बंगले के मालिक थे..लेकिन राजेन्द्र कुमार ने इस शर्त पर बंगला दिया कि इसका नाम आप कोई और रखेंगे डिंपल नहीं.. राजेन्द्र कुमार ने एक अन्य बंगला बनाया और उसमें यही नाम दुबारा रखा..राजेश खन्ना फौरन मान गए और अपने इस बंगले के नाम रखा *"आशीर्वाद"* लेकिन ये बंगला राजेश खन्ना को ज्यादा फला नहीं इसके लेने के दो-तीन सालों में ही राजेश खन्ना का कैरियर नीचे आता गया..शादी हुई इसी बंगले में लेकिन वो भी ज्यादा सफल नहीं रही..जिसका नतीजा अलहदगी हो गयी राजेश खन्ना और डिंपल के बीच.. राजेश खन्ना इस बंगले में आने के बाद फिर वो कभी उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच सके जहां वो पहले थे.. धीरे-धीरे वो भी गुमनाम होते गए और आख़िर में मरने के बाद अपनी वसीयत में ये बंगला जब वो अपनी बेटियों के नाम कर गए तो उन्होंने इसे बेच दिया और आधा-आधा पैसा बांट लिया.. *आशीर्वाद बंगला बिका 150 करोड़ रुपये में..* आखिर में भारत भूषण..? जिनका ये बंगला था..वो जीवन के आख़िरी सफ़र तक एक चाल (झोपड़पट्टी) टाइप में ही रहे और बसों में सफर करते रहे वो बस से उस बंगले से होकर कई बार गुज़रे और देखा करते जो कभी उनका अपना था..! *वक़्त की मार आख़िर इसे ही तो कहते है..!*


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जोहा ने पास किया: *जोहा ने स्टेंडर्ड मैथ लेकर 92.1% मार्क्स हाईस्कूल में लाई* फतेहपुर, जानेमाने वरिष्ठ पत्रकार शकील अहमद सिद्दीकी की दुलारी बेटी जो महर्षि विद्या मंदिर फतेहपुर की छात्रा जोहा सिद्दीकी ने हाईस्कूल मे स्टेंडर्ड मैथ लेकर 92.1% मार्क्स प्राप्त कर सिद्दीकी परिवार का नाम रोशन कर गौरव बढ़ाया। इष्ट मित्रों ने दी जोहा सिद्दीकी को हार्दिक शुभकामनाएं व मुबारकबाद। कृत्य:नायाब टाइम्स
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Upsrtc.: *उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासनिक) 'वरिष्ठ पी.सी.एस' श्री विजय नारायण पाण्डेय 31 मई को होंगे रिटायर* लखनऊ। उ.प्र. परिवहन निगम के मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासनिक) विजय नारायण पांडेय (वरिष्ठ पी.सी.एस.) ने दिनाँक 20 दिसम्बर 2018 को इस पद का पदभार संभाला था और वो 5 महीना 11 दिन की सेवा करने के बाद 31 मई 2019 को विभाग को अच्छी अनुभवी जानकारियां देते हुए अपने पद से रिटायर हो जाएंगे। उनके परिवहन निगम के कार्य कलाप की सभी अधिकारियों ने सराहना की। श्री पांडेय का मत है कि अधिकारी को विभाग के हित में ही काम करना चाहिए। उन्होंने कहा हमारे बास श्री संजीव सरन वरिष्ठ आई.ए.एस., चेयरमैन, श्री धीरज शाहू वरिष्ठ,आई.ए.एस. ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, प्रबंध निदेशक राधे श्याम आई.ए.एस. अपर प्रबंध निदेशक से भी हमको कुछ नई जानकारियां मिली जो एक नसीहत ही है। परिवहन निगम के आशुतोष गौड़ स्टाफ ऑफिसर, पर्सनल असिस्टेंट प्रबंध निदेशक व अनवर अंजार (जनसंपर्क अधिकारी, परिवहन निगम) ने भी अपने अधिकारी श्री वी. एन. पाण्डेय की प्रशंसा करते हुए बताया कि पाण्डेय जी के साथ काम करना एक नायाब अनुभव के बराबर है। अब शायद ही ऐसा अधिकारी हमारे बीच आये। - नायाब अली
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डागामर वाहनों को : *जॉइंट चेकिंग ने सीट क्षमता से अधिक यात्री ढो रही डग्गामार वाहन को पकड़कर की कार्यवाही,मचा हड़कंप* लखनऊ, शासन प्रशासन द्वारा सभी प्रकार के वाहनों में सीट क्षमता से अधिक यात्रियों को कोरोना काल मे मना किया है,इसके बाबजूद भी डग्गामार वाहन दिल खोलकर क्षमता से अधिक यात्री भरकर रोड पर फर्राटा भर रही है।आज दिनांक 20 अगस्त को एआरटीओ सिद्धार्थ यादव,पीटीओ आशुतोष उपाध्याय और एआरएम चारबाग अमरनाथ सहाय ने लखनऊ पीजीआई थाना के सामने डग्गामार वाहनों की छापेमारी करते हुए प्राइवेट बस नम्बर यू०पी०51-ए०टी० 2232 जो बिहार से दिल्ली जा रही 42 सीटर डग्गामार बस जिसमें 107 यात्री सवार थे को पकड़कर सीज कर दिया। और यात्रियों को चारबाग डिपो की बसों में ट्रांसफर कर आलमबाग बस स्टेशन पर भेज दिया। इस बस के पकड़े जाने के बाद डग्गामार वाहनों के संचालकों में हाहाकार मच गया। कृत्य:नायाब टाइम्स *अस्लामु अलैकुम/शुभरात्रि*
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मास्क वितरण: *रोडवेज के एमडी राजशेखर जी ने प्रख्यात सभी अखबार के मीडिया स्टाफ कर्मियों को उनके ऑफिस जाकर वितरित किये मास्क* लखनऊ,"शहरे अवध लखनऊ" उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के सुपरमैन डॉ० राजशेखर "प्रबंध निदेशक" ने नव भारत टाइम्स,टाइम्स ऑफ इंडिया,हिंदुस्तान 'अंग्रेज़ी' हिंदुस्तान,दैनिक जागरण,अमर उजाला,स्वतंत्र भारत एवं सभी हिंदी अंग्रेजी अखबारो के स्टाफ कर्मियों व मुख्य डिस्टिब्यूटर और हाकर्स को एक एक 1000 मास्क वितरित किये। यह मास्क अखबारों को घर-घर पहुचाने वालों से लेकर संपादक,डिस्टिब्यूटर तक के कर्मियों को दिया। *कृत्य:नायाब टाइम्स*
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मृत्यु लोक पे नायाब बनकर रहो: *मृत्यु लोक पे नायाब बनाकर वरना सिकन्दर भी....!* रायबरेली,काबिले तारीफ़ है डॉ०आर०बी०वर्मा "वरिष्ठ शल्यक" *राज नर्सिंगहोम* सी०-201,आवास विकास कॉलोनी, इंदिरानगर रायबरेली व डॉ०मुम्मताज अहमद हमारे 45 वर्ष पुराने दोस्तों में से एक है। शहर मे नाम के साथ अच्छी पहचाना उनके अनुभवो के साथ उपचार करने के कारण मरीज़ो के बीच है । एक मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा ज़िन्दगी हो तो नायाब जैसी वरना मृत्युलोक में सिकन्दर भी था। कृत्य:नायाब टाइम्स
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