Upsrtc का खुला पत्र: प्रिय अधिकारी गण और मीडिया मित्रों गुड आफ्टरनून ------------ प्रयाग राज में सिविल लाइंस बस स्टेशन और यूपीएसआरटीसी के जीरो रोड वर्क शॉप पर आज की विजिट के महत्वपूर्ण हाईलाइट्स इस प्रकार हैं: 1- यह विजिट यूपीएसआरटीसी प्रयाग राज के आरएम, प्रयागराज सिटी बस सेवा के आरएम, एआरएम और सिविल लाइन्स प्रयाग राज के मैनेजर के साथ की गई। 2- प्रबंध निदेशक (एमडी) ने कैम्पस का निरीक्षण किया और "इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस)" सिस्टम के सेटअप और कार्य प्रगति की जांच की। एमडी ने रेडमली कुछ बसों का निरीक्षण किया और यात्रियों से उनकी प्रतिक्रिया के लिए बातचीत की। एमडी ने इस परिक्षेत्र के आरएम, एसएम और सभी एआरएम की विस्तृत बैठक ली। 2- प्रयाग राज परिक्षेत्र में लगभग 599 बसें (522 निगम की बसें और 77 अनुबंधित बसें) हैं। आईटीएमएस प्रणाली के तहत, इस परिक्षेत्र में सबसे अच्छा यह है कि 99.9 % टिकट हाथ से चलने वाली "इलेक्ट्रॉनिक टिकट ईश्यू मशीन (ईटीआईएम)" के द्वारा जारी किए जाते हैं। 3- लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुल 599 बसों में से, केवल 50 प्रतिशत वाहनों में ही वेहकिल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) काम कर रहा है और बाकी या तो नॉन- फंग्शनल हैं या मरम्मत के लायक है। एमडी ने इसे काफी गंभीरता से लिया और इसे बहुत ही आपत्तिजनक पाया। गति नियंत्रण उपकरण (एससीडी) लगाए गए हैं और ठीक तरह से काम कर रहा। 4- जब एमडी ने बस का निरीक्षण करते हुए चालक, कंडक्टर और यात्रियों से बातचीत की, तो एमडी के संज्ञान में आया है कि 50 प्रतिशत से अधिक ड्राइवर अपनी "वर्दी" नहीं पहनते हैं। इस बस से "फर्स्ट एड मेडिकल किट" गायब थी। जब कंडक्टर से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि कुछ दिनों से इसकी मांग बढ़ गई थी इसलिए इस चीजों का इस्तेमाल किया जा चुका है। 5- बस स्टेशन परिसर में शौचालय (पुरुष और महिला के लिए अलग) मौजूद थे और अच्छी तरह से मेंटेन रखे गये हैं। लेकिन इस बस स्टैंड को एक और टॉयलेट ब्लॉक की जरूरत है क्योंकि यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। "पब्लिक एड्रेस सिस्टम" ठीक तरह से काम कर रहा था और यह स्पष्ट और श्रव्य रहा। परंतु " सार्वजनिक संबोधन प्रणाली" (पीआईएस) एलईडी डिस्प्ले बोर्ड चालू नहीं था। यह आपत्तिजनक है। 6- एमडी ने जब ड्राइवरों के "स्वास्थ्य की जांच की स्थिति" के बारे में पूछा, तो आरएम ने बताया कि कुंभ मेले से आठ महीने पहले सभी ड्राइवरों का 100 प्रतिशत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था और प्रत्येक के सारे रिकॉर्ड अच्छी तरह से मेंटेन हैं। 7- यह अच्छा है कि एक दिन (लंबी दूरी / राष्ट्रीय राजमार्ग / एक्सप्रेसवे) में 300 किमी से अधिक की यात्रा करने वाली इस परिक्षेत्र की 80 बसों में दो ड्राइवर तैनात हैं। एमडी ने एआरएम और स्टेशन प्रबंधक से व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि एक दिन में 300 किमी से ज्यादा दूरी तय करने वाली बसों में नियुक्त "दोनों ड्राइवर" मौजूद रहकर ड्यूटी करते रहें। 8- एमडी ने प्रत्येक बस डिपो की "आय और व्यय की स्थिति" की अलग से समीक्षा की। जिसकी पाया गया कि राज्य मासिक रैंकिंग में इस परिक्षेत्र के दो स्टेशन प्रतापगढ़ और जीरो रोड डिपो 7वें और 8वें स्थान पर हैं। अन्य स्टेशनों जैसे लालगंज और सिविल लाइंस को अपनी रैंकिंग में सुधार करने की आवश्यकता है क्योंकि वे 80वें रैंकिंग से ऊपर हैं। 9- एमडी ने जीरो रोड कार्यशाला का दौरा किया और कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने "सड़क सुरक्षा कार्यशाला कक्ष" का दौरा किया और चालकों के साथ बातचीत की। यह उनकी दूसरी जागरूकता कार्यशाला है और पिछली नवंबर 2018 में कुंभ मेले से पहले आयोजित की गई थी। वे गदगद थे कि पिछले सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला के कारण, पूरा कुंभ मेला परिवहन "हादसा मुक्त" रहा। 10- फील्ड विजिट, साइट निरीक्षण और अधिकारियों के साथ बैठक के बाद, एमडी ने सेवाओं में सुधार और बेहतरी के लिए निम्नलिखित निर्णय लिया / कार्रवाई की: ए- यह सुनिश्चित हो कि ड्यूटी समय के दौरान सभी चालक "वर्दी" पहनें, निगम में सभी संविदा ड्राइवरों के यूनिफॉर्म न पहनने के प्रत्येक इंस्टेंस पर "संबंधित ड्राइवर के वेतन से 100 रुपये की कटौती" का प्रस्तावित की जाए। निगम के ड्राइवर्स की "विभागीय जांच " सेटअप की जाए। यदि प्रति माह की फ्रीक्वेंसी तीन से अधिक है तो उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा। निगम जल्द ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा। बी- इसी तरह यदि कंडक्टर यात्रा के दौरान अपने साथ "फर्स्ट एड मेडिकल किट" नहीं रखता है तो उसके वेतन से सौ रुपये कटौती का प्रस्ताव और "डिपार्टमेंट इंक्वायरी" भी सेट अप की जा सकती है। जिस पर निगम जल्द ही आवश्यक निर्देश जारी करेगा। सी- जल्द ही सभी बसों में सभी ड्राइवरों और कंडक्टरों के लिए चेतावनी और जनता की जानकारी के लिए "क्या करें" और " क्या न करें " डिस्प्ले किए जाएंगे। डी- वेहकिल ट्रैकिंग डिवाइसेज और सार्वजनिक सूचना डिस्प्ले पैनल के खराब प्रदर्शन के लिए आईटीएमएस का कार्य करने वाली निजी फर्म के भुगतान से धनराशि की कटौती के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना है। ई- यदि कोई लंबी दूरी (राष्ट्रीय राजमार्ग / एक्सप्रेस-वे मार्गों / रात मार्गों) की बसों को बिना दो चालकों के, गति नियंत्रण उपकरण (एससीडी) और वेहकिल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) के भेजने पर संबंधित बस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को निलंबित कर दिया जाएगा। सभी एआरएम, एसएम, बस डिपो के इंचार्ज के द्वारा इसे दैनिक रूप से सुनिश्चित किया जाए ताकि दुघर्टनाओं के जाखिम को कम किया जा सके। ----------- धन्यवाद राज शेखर एमडी यूपीएसआरटी


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Upsrtc.: *उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासनिक) 'वरिष्ठ पी.सी.एस' श्री विजय नारायण पाण्डेय 31 मई को होंगे रिटायर* लखनऊ। उ.प्र. परिवहन निगम के मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासनिक) विजय नारायण पांडेय (वरिष्ठ पी.सी.एस.) ने दिनाँक 20 दिसम्बर 2018 को इस पद का पदभार संभाला था और वो 5 महीना 11 दिन की सेवा करने के बाद 31 मई 2019 को विभाग को अच्छी अनुभवी जानकारियां देते हुए अपने पद से रिटायर हो जाएंगे। उनके परिवहन निगम के कार्य कलाप की सभी अधिकारियों ने सराहना की। श्री पांडेय का मत है कि अधिकारी को विभाग के हित में ही काम करना चाहिए। उन्होंने कहा हमारे बास श्री संजीव सरन वरिष्ठ आई.ए.एस., चेयरमैन, श्री धीरज शाहू वरिष्ठ,आई.ए.एस. ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, प्रबंध निदेशक राधे श्याम आई.ए.एस. अपर प्रबंध निदेशक से भी हमको कुछ नई जानकारियां मिली जो एक नसीहत ही है। परिवहन निगम के आशुतोष गौड़ स्टाफ ऑफिसर, पर्सनल असिस्टेंट प्रबंध निदेशक व अनवर अंजार (जनसंपर्क अधिकारी, परिवहन निगम) ने भी अपने अधिकारी श्री वी. एन. पाण्डेय की प्रशंसा करते हुए बताया कि पाण्डेय जी के साथ काम करना एक नायाब अनुभव के बराबर है। अब शायद ही ऐसा अधिकारी हमारे बीच आये। - नायाब अली
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Santa. ! ये मध्यप्रदेश में....खरगौन के पास ही ग्राम भट्टयान के "संत सियाराम" है ....जहाँ नर्मदा नदी भी है वर्तमान में जहाँ बाबा का निवास है वह क्षेत्र डूब में जाने वाला है ...सरकार ने इन्हें मुवावजे के 2 करोड़ 51 लाख दिए थे.... तो इन्होंने सारा पैसा खरगौन के समीप ही ग्राम नांगलवाड़ी में नाग देवता के मंदिर में दान कर दिया ताकि वहा भव्य मंदिर बने और सुविधा मिले।। बहुत ही पहुचे हुये सन्त है । आप लाखो रुपये दान में दो... पर नही लेते केवल 10 रुपये लेते है ...और रजिस्टर में देने वाले का नाम साथ ही नर्मदा परिक्रमा वालो का खाना और रहने की व्यवस्था ...कई सालों से अनवरत करते आ रहे है..! सारा दिन दर्शन करने वालो के लिए चाय बनाई जाती है। 100 वर्ष पूरे कर चुके है।। ऐसे ही सन्तों का सम्मान होना चाहिए.. ❤🙏🏻❤
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प०राम प्रसाद बिस्मिल जी हज़रो नमन: *“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” : कब और कैसे लिखा राम प्रसाद बिस्मिल ने यह गीत!* राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ का नाम कौन नहीं जानता। बिस्मिल, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दे दी। वे मैनपुरी षडयंत्र व काकोरी-कांड जैसी कई घटनाओं मे शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सदस्य भी थे। भारत की आजादी की नींव रखने वाले राम प्रसाद जितने वीर, स्वतंत्रता सेनानी थे उतने ही भावुक कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार व साहित्यकार भी थे। बिस्मिल उनका उर्दू उपनाम था जिसका हिन्दी में अर्थ होता है ‘गहरी चोट खाया हुआ व्यक्ति’। बिस्मिल के अलावा वे राम और अज्ञात के नाम से भी लेख व कवितायें लिखते थे। *राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ की तरह अशफ़ाक उल्ला खाँ भी बहुत अच्छे शायर थे। एक रोज का वाकया है अशफ़ाक, आर्य समाज मन्दिर शाहजहाँपुर में बिस्मिल के पास किसी काम से गये। संयोग से उस समय अशफ़ाक जिगर मुरादाबादी की यह गजल गुनगुना रहे थे* “कौन जाने ये तमन्ना इश्क की मंजिल में है। जो तमन्ना दिल से निकली फिर जो देखा दिल में है।।” बिस्मिल यह शेर सुनकर मुस्करा दिये तो अशफ़ाक ने पूछ ही लिया- “क्यों राम भाई! मैंने मिसरा कुछ गलत कह दिया क्या?” इस पर बिस्मिल ने जबाब दिया- “नहीं मेरे कृष्ण कन्हैया! यह बात नहीं। मैं जिगर साहब की बहुत इज्जत करता हूँ मगर उन्होंने मिर्ज़ा गालिब की पुरानी जमीन पर घिसा पिटा शेर कहकर कौन-सा बड़ा तीर मार लिया। कोई नयी रंगत देते तो मैं भी इरशाद कहता।” अशफ़ाक को बिस्मिल की यह बात जँची नहीं; उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा- “तो राम भाई! अब आप ही इसमें गिरह लगाइये, मैं मान जाऊँगा आपकी सोच जिगर और मिर्ज़ा गालिब से भी परले दर्जे की है।” *उसी वक्त पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने यह शेर कहा* “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-कातिल में है?” यह सुनते ही अशफ़ाक उछल पड़े और बिस्मिल को गले लगा के बोले- “राम भाई! मान गये; आप तो उस्तादों के भी उस्ताद हैं।” आगे जाकर बिस्मिल की यह गज़ल सभी क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की गाड़ी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढ़ाते हुए और अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए एक साथ गाया करते थे। बिस्मिल की शहादत के बाद उनका यह गीत क्रान्तिकारियों के लिए मंत्र बन गया था। न जाने कितने क्रांतिकारी इसे गाते हुए हँसते-हँसते फांसी पर चढ़ गए थे। पढ़िए राम प्रसाद बिस्मिल द्वारा लिखा गया देशभक्ति से ओतप्रोत यह गीत – सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ! हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है? एक से करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है। रहबरे-राहे-मुहब्बत! रह न जाना राह में, लज्जते-सेहरा-नवर्दी दूरि-ए-मंजिल में है। अब न अगले वल्वले हैं और न अरमानों की भीड़, एक मिट जाने की हसरत अब दिले-‘बिस्मिल’ में है । ए शहीद-ए-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफ़िल में है। खींच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद, आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? है लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर, और हम तैयार हैं सीना लिये अपना इधर। खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हाथ जिनमें हो जुनूँ , कटते नही तलवार से, सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से, और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है , सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हम तो निकले ही थे घर से बाँधकर सर पे कफ़न, जाँ हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम। जिन्दगी तो अपनी महमाँ मौत की महफ़िल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। यूँ खड़ा मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार, “क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?” सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब, होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज। दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है! सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। जिस्म वो क्या जिस्म है जिसमें न हो खूने-जुनूँ, क्या वो तूफाँ से लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है। पं० राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ उनके इस लोकप्रिय गीत के अलावा ग्यारह वर्ष के क्रान्तिकारी जीवन में बिस्मिल ने कई पुस्तकें भी लिखीं। जिनमें से ग्यारह पुस्तकें ही उनके जीवन काल में प्रकाशित हो सकीं। ब्रिटिश राज में उन सभी पुस्तकों को ज़ब्त कर लिया गया था। पर स्वतंत्र भारत में काफी खोज-बीन के पश्चात् उनकी लिखी हुई प्रामाणिक पुस्तकें इस समय पुस्तकालयों में उपलब्ध हैं। 16 दिसम्बर 1927 को बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा का आखिरी अध्याय (अन्तिम समय की बातें) पूर्ण करके जेल से बाहर भिजवा दिया। 18 दिसम्बर 1927 को माता-पिता से अन्तिम मुलाकात की और सोमवार 19 दिसम्बर 1927 को सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर गोरखपुर की जिला जेल में उन्हें फाँसी दे दी गयी। राम प्रसाद बिस्मिल और उनके जैसे लाखो क्रांतिकारियों के बलिदान का देश सद्येव ऋणी रहेगा! जय हिन्द !
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मुत्यु लोक का सच:*आचार्य रजनीश* (१) जब मेरी मृत्यु होगी तो आप मेरे रिश्तेदारों से मिलने आएंगे और मुझे पता भी नहीं चलेगा, तो अभी आ जाओ ना मुझ से मिलने। (२) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आप मेरे सारे गुनाह माफ कर देंगे, जिसका मुझे पता भी नहीं चलेगा, तो आज ही माफ कर दो ना। (३) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आप मेरी कद्र करेंगे और मेरे बारे में अच्छी बातें कहेंगे, जिसे मैं नहीं सुन सकूँगा, तो अभी कहे दो ना। (४) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आपको लगेगा कि इस इन्सान के साथ और वक़्त बिताया होता तो अच्छा होता, तो आज ही आओ ना। इसीलिए कहता हूं कि इन्तजार मत करो, इन्तजार करने में कभी कभी बहुत देर हो जाती है। इस लिये मिलते रहो, माफ कर दो, या माफी माँग लो। *मन "ख्वाईशों" मे अटका रहा* *और* *जिन्दगी हमें "जी "कर चली गई.*
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स्पोर्ट्समैन जाफ़र के सम्मान में क्रिकेट मैच: *जाफ़र मेहदी वरिष्ठ केन्द्र प्रभारी कैसरबाग डिपो कल 30 नवम्बर 2020 सोमवार को सेवानिवृत्त हो जाएगे उनके सम्मान में क्रिकेट मैच परिवहन निगम ने आयोजित किया* लखनऊ, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के स्पोर्ट्समैन जाफ़र मेहंदी जो 30 नवम्बर 2020 को सेवानिवृत्त हो जाएंगे को "मुख्य महाप्रबंधक प्रशासन" सन्तोष कुमार दूबे "वरि०पी०सी०एस०" द्वारा उनके सम्मान में क्रिकेट मैच आयोजित कर उनका सम्मान किया जायेगा , जिसमें एहम किरदार पी०आर०बेलवारिया "मुख्य महाप्रबंधक "संचालन" व पल्लव बोस क्षेत्रीय प्रबन्धक-लखनऊ एवं प्रशांत दीक्षित "प्रभारी स०क्षे०प्रबन्धक" हैं जो * अवध बस स्टेशन कमता लखनऊ* के पद पर तैनात हैं , इस समय *कैसरबाग डिपो* के भी "प्रभारी स०क्षे०प्र०" हैं। कैसरबाग डिपो के वरिष्ठ केन्द्र प्रभारी जाफ़र मेहदी साहब दिनाँक,30 नवम्बर 2020 को कल सेवानिवृत्त हो जायेगे। जाफ़र मेहदी साहब की भर्ती स्पोर्ट्स कोटा के तहत 1987 में परिवहन निगम में हुई थी। जो पछले तीन सालो से दो धारी तलवार के चपेट कि मार झेल रहे थे अब आज़ादी उनके हाथ लगी मेंहदी साहब नायाब ही नहीं तारीफे काबिल हैं उनकी जितनी भी बड़ाई की जाय कम हैl कृत्य:नायाब टाइम्स
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