सी०एम०एस०:*71देशो की हस्तियां सी०एम०एस०के तत्वावधान में जगदीश गाँधी साथ* लखनऊ।सिटी मोंटेसरी स्कूल के तत्वावधान में आयोजित विश्व के मुख्य न्यायधीशों के 20वे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पधारे 71 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायविद, कानूनविद व अन्य मशहूर हस्तियों ने लखनऊ घोषणा पत्र के माध्यम से विश्व के सभी देशों का आह्वान किया है कि भावी पीढ़ी के हित मे नई विश्व व्यवस्था बनाने हेतु एकजुट हो। कृत्य:नायाब टाइम्स


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Upsrtc.: *उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासनिक) 'वरिष्ठ पी.सी.एस' श्री विजय नारायण पाण्डेय 31 मई को होंगे रिटायर* लखनऊ। उ.प्र. परिवहन निगम के मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासनिक) विजय नारायण पांडेय (वरिष्ठ पी.सी.एस.) ने दिनाँक 20 दिसम्बर 2018 को इस पद का पदभार संभाला था और वो 5 महीना 11 दिन की सेवा करने के बाद 31 मई 2019 को विभाग को अच्छी अनुभवी जानकारियां देते हुए अपने पद से रिटायर हो जाएंगे। उनके परिवहन निगम के कार्य कलाप की सभी अधिकारियों ने सराहना की। श्री पांडेय का मत है कि अधिकारी को विभाग के हित में ही काम करना चाहिए। उन्होंने कहा हमारे बास श्री संजीव सरन वरिष्ठ आई.ए.एस., चेयरमैन, श्री धीरज शाहू वरिष्ठ,आई.ए.एस. ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, प्रबंध निदेशक राधे श्याम आई.ए.एस. अपर प्रबंध निदेशक से भी हमको कुछ नई जानकारियां मिली जो एक नसीहत ही है। परिवहन निगम के आशुतोष गौड़ स्टाफ ऑफिसर, पर्सनल असिस्टेंट प्रबंध निदेशक व अनवर अंजार (जनसंपर्क अधिकारी, परिवहन निगम) ने भी अपने अधिकारी श्री वी. एन. पाण्डेय की प्रशंसा करते हुए बताया कि पाण्डेय जी के साथ काम करना एक नायाब अनुभव के बराबर है। अब शायद ही ऐसा अधिकारी हमारे बीच आये। - नायाब अली
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Santa. ! ये मध्यप्रदेश में....खरगौन के पास ही ग्राम भट्टयान के "संत सियाराम" है ....जहाँ नर्मदा नदी भी है वर्तमान में जहाँ बाबा का निवास है वह क्षेत्र डूब में जाने वाला है ...सरकार ने इन्हें मुवावजे के 2 करोड़ 51 लाख दिए थे.... तो इन्होंने सारा पैसा खरगौन के समीप ही ग्राम नांगलवाड़ी में नाग देवता के मंदिर में दान कर दिया ताकि वहा भव्य मंदिर बने और सुविधा मिले।। बहुत ही पहुचे हुये सन्त है । आप लाखो रुपये दान में दो... पर नही लेते केवल 10 रुपये लेते है ...और रजिस्टर में देने वाले का नाम साथ ही नर्मदा परिक्रमा वालो का खाना और रहने की व्यवस्था ...कई सालों से अनवरत करते आ रहे है..! सारा दिन दर्शन करने वालो के लिए चाय बनाई जाती है। 100 वर्ष पूरे कर चुके है।। ऐसे ही सन्तों का सम्मान होना चाहिए.. ❤🙏🏻❤
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शहीद को नमन: *डीएम-एसपी शहीद को कंधा देते व पुष्पचक्र अर्पित कर सलामी व हाथ जोड़कर अन्तिम विदाई दी, दाहसंस्कार, उ0प्र0 के मुख्यमंत्री ने शहीद जवान श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह के शौर्य और वीरता को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी दी श्रद्धांजलि ...प्रदेश सरकार शहीद के परिवार को हर सम्भव करेगी मदद! डीएम-एसपी व जनप्रतिनिधियों व शहीद के परिजनों जनपद के लाल व वीर जवान शहीद शैलेन्द्र प्रताप सिंह को पुष्पचक्र अर्पित कर सलामी व हाथ जोड़कर नम आखों से शहीद को दी अन्तिम विदाई देश की सेवा करते शहीद हुए जनपद का वीर जवान शहीद शैलेन्द्र प्रताप सिंह की शहादत पर है गर्व: डीएम-एसपी शहीद शैलेन्द्र प्रताप सिंह का राजकीय सम्मान के साथ किया गया अन्तिम संस्कार* रायबरेली, "सू०वि०रा०" श्रीनगर के सोपोर में देश की सेवा करते हुए विगत दिवस से आतंकी हमले में रायबरेली के लाल व वीर जवान शैलेन्द्र प्रताप सिंह शहीद हो गए थे। देर साय शहीद का पार्थिव शरीर उनके निवास मलिकमऊ जवाहर बिहार कालोनी व पैतृक तहसील डलमऊ के ग्राम मीर मीरानपुर (अल्हौरा) पार्थिव शरीर के पहुंचते ही घर व क्षेत्र में कोहराम के मध्य शहीद शैलेन्द्र प्रताप सिंह के अन्तिम दर्शन के लिए पूरा जनपद उमड़ा पड़ा। शहीदों की मजारों पर हर बरस लगेंगे मेले, वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होंगा। राष्ट्र रक्षा का संकल्प पूरा करते-करते ओढ़ लिया तिरंगे का कफन। जबतक सूरज चांद रहेगा शैलेन्द्र सिंह तेरा नाम रहेगा के नारों से जनपद में गूंज रही। शहीद के पार्थिव शरीर को उनके बेटे कुशाग्र ने पिता को जहां सलामी दी वही जनपद के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव व पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार, एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह, विधायक अदिति सिंह, दल बहादुर कोरी, राकेश कुमार सिंह, धीरेन्द्र बहादुर सिंह, मनोज कुमार पाण्डेय, राम नरेश रावत, धीरेन्द्र बहादुर सिंह, पूर्व विधायक राम लाल अकेला कई राजनैतिक पार्टियों के प्रतिनिधि व भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास तथा टेक्सटाइल मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी/प्रतिनिधि आदि ने भी पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किये। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव व पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार समेत कई जनप्रतिनिधि ने शहीद शैलेन्द्र प्रताप सिंह की अर्थी को कंधा दिया और पूरे राजकीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार डलमऊ के घाट पर किया गया। बता दें कि रायबरेली के निवासी शहीद शैलेन्द्र प्रताप सिंह श्रीनगर के सोपोर में तैनात थे, ड्यूटी के दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए रायबरेली का लाल शहीद हो गया। जिसके बाद से क्षेत्र व घर में शहीद के परिजनों में कोहराम मचा गया, शहादत की खबर सुनकर घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल है तो वहीं इस घटना से पूरा क्षेत्र गमगीन है, शहीद शैलेन्द्र प्रताप सिंह तीन बहनों में एक इकलौता भाई था जो कि श्रीनगर में सीआरपीएफ की 110वी कंपनी में सोपोर में तैनात था। शहीद की शहादत पर गर्व है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने श्रीनगर में आतंकी हमले में जनपद रायबरेली निवासी सी0आर0पी0एफ0 के शहीद जवान श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह के शौर्य और वीरता को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री जी ने शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। उन्होंने शहीद के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा जनपद की एक सड़क का नामकरण शहीद श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह के नाम पर करने की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री जी ने शहीद श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि शोक की इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ है। प्रदेश सरकार द्वारा शहीद के परिवार को हर सम्भव मदद प्रदान की जायेगी। घटना पर प्रदेश के मंत्री, केन्द्रीय मंत्री ने अमर शहीद जवान शैलेन्द्र प्रताप सिंह की शहादत पर विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि दुःख की इस घड़ी में हम सभी शहीद के परिजनों के साथ हैं, ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें, इतना ही नहीं, जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव व पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार समेत जनपद के सभी जनप्रतिनिधियों ने शोक सम्वेदना व्यक्त की, अमर शहीद जवान शैलेन्द्र प्रताप सिंह की शहादत पर डीएम ने विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। तहसील डलमऊ के गंगाघाट पर शहीद शैलेन्द्र प्रताप सिंह को अन्तिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ दी गई। शहीद की पत्नी चांदनी सहित पिता नरेन्द्र बहादुर सिंह व माता सिया दुलारी तथा अन्य परिजनों ने भी जनपद रायबरेली के लाल व वीर जवान शहीद शैलेन्द्र प्रताप सिंह को सलामी व हाथ जोड़कर अन्तिम विदाई दी गई। शहीद के पिता नरेन्द्र सिंह ने शहीद के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी तथा सीआरपीएफ ने शहीद को गाॅड आॅफ आॅनर भी दिया गया तथा डलमऊ घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अन्तिम संस्कार किया गया। कृत्य:नायाब टाइम्स
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मुत्यु लोक का सच:*आचार्य रजनीश* (१) जब मेरी मृत्यु होगी तो आप मेरे रिश्तेदारों से मिलने आएंगे और मुझे पता भी नहीं चलेगा, तो अभी आ जाओ ना मुझ से मिलने। (२) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आप मेरे सारे गुनाह माफ कर देंगे, जिसका मुझे पता भी नहीं चलेगा, तो आज ही माफ कर दो ना। (३) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आप मेरी कद्र करेंगे और मेरे बारे में अच्छी बातें कहेंगे, जिसे मैं नहीं सुन सकूँगा, तो अभी कहे दो ना। (४) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आपको लगेगा कि इस इन्सान के साथ और वक़्त बिताया होता तो अच्छा होता, तो आज ही आओ ना। इसीलिए कहता हूं कि इन्तजार मत करो, इन्तजार करने में कभी कभी बहुत देर हो जाती है। इस लिये मिलते रहो, माफ कर दो, या माफी माँग लो। *मन "ख्वाईशों" मे अटका रहा* *और* *जिन्दगी हमें "जी "कर चली गई.*
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प०राम प्रसाद बिस्मिल जी हज़रो नमन: *“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” : कब और कैसे लिखा राम प्रसाद बिस्मिल ने यह गीत!* राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ का नाम कौन नहीं जानता। बिस्मिल, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दे दी। वे मैनपुरी षडयंत्र व काकोरी-कांड जैसी कई घटनाओं मे शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सदस्य भी थे। भारत की आजादी की नींव रखने वाले राम प्रसाद जितने वीर, स्वतंत्रता सेनानी थे उतने ही भावुक कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार व साहित्यकार भी थे। बिस्मिल उनका उर्दू उपनाम था जिसका हिन्दी में अर्थ होता है ‘गहरी चोट खाया हुआ व्यक्ति’। बिस्मिल के अलावा वे राम और अज्ञात के नाम से भी लेख व कवितायें लिखते थे। *राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ की तरह अशफ़ाक उल्ला खाँ भी बहुत अच्छे शायर थे। एक रोज का वाकया है अशफ़ाक, आर्य समाज मन्दिर शाहजहाँपुर में बिस्मिल के पास किसी काम से गये। संयोग से उस समय अशफ़ाक जिगर मुरादाबादी की यह गजल गुनगुना रहे थे* “कौन जाने ये तमन्ना इश्क की मंजिल में है। जो तमन्ना दिल से निकली फिर जो देखा दिल में है।।” बिस्मिल यह शेर सुनकर मुस्करा दिये तो अशफ़ाक ने पूछ ही लिया- “क्यों राम भाई! मैंने मिसरा कुछ गलत कह दिया क्या?” इस पर बिस्मिल ने जबाब दिया- “नहीं मेरे कृष्ण कन्हैया! यह बात नहीं। मैं जिगर साहब की बहुत इज्जत करता हूँ मगर उन्होंने मिर्ज़ा गालिब की पुरानी जमीन पर घिसा पिटा शेर कहकर कौन-सा बड़ा तीर मार लिया। कोई नयी रंगत देते तो मैं भी इरशाद कहता।” अशफ़ाक को बिस्मिल की यह बात जँची नहीं; उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा- “तो राम भाई! अब आप ही इसमें गिरह लगाइये, मैं मान जाऊँगा आपकी सोच जिगर और मिर्ज़ा गालिब से भी परले दर्जे की है।” *उसी वक्त पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने यह शेर कहा* “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-कातिल में है?” यह सुनते ही अशफ़ाक उछल पड़े और बिस्मिल को गले लगा के बोले- “राम भाई! मान गये; आप तो उस्तादों के भी उस्ताद हैं।” आगे जाकर बिस्मिल की यह गज़ल सभी क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की गाड़ी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढ़ाते हुए और अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए एक साथ गाया करते थे। बिस्मिल की शहादत के बाद उनका यह गीत क्रान्तिकारियों के लिए मंत्र बन गया था। न जाने कितने क्रांतिकारी इसे गाते हुए हँसते-हँसते फांसी पर चढ़ गए थे। पढ़िए राम प्रसाद बिस्मिल द्वारा लिखा गया देशभक्ति से ओतप्रोत यह गीत – सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ! हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है? एक से करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है। रहबरे-राहे-मुहब्बत! रह न जाना राह में, लज्जते-सेहरा-नवर्दी दूरि-ए-मंजिल में है। अब न अगले वल्वले हैं और न अरमानों की भीड़, एक मिट जाने की हसरत अब दिले-‘बिस्मिल’ में है । ए शहीद-ए-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफ़िल में है। खींच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद, आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? है लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर, और हम तैयार हैं सीना लिये अपना इधर। खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हाथ जिनमें हो जुनूँ , कटते नही तलवार से, सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से, और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है , सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हम तो निकले ही थे घर से बाँधकर सर पे कफ़न, जाँ हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम। जिन्दगी तो अपनी महमाँ मौत की महफ़िल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। यूँ खड़ा मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार, “क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?” सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब, होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज। दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है! सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। जिस्म वो क्या जिस्म है जिसमें न हो खूने-जुनूँ, क्या वो तूफाँ से लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है। पं० राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ उनके इस लोकप्रिय गीत के अलावा ग्यारह वर्ष के क्रान्तिकारी जीवन में बिस्मिल ने कई पुस्तकें भी लिखीं। जिनमें से ग्यारह पुस्तकें ही उनके जीवन काल में प्रकाशित हो सकीं। ब्रिटिश राज में उन सभी पुस्तकों को ज़ब्त कर लिया गया था। पर स्वतंत्र भारत में काफी खोज-बीन के पश्चात् उनकी लिखी हुई प्रामाणिक पुस्तकें इस समय पुस्तकालयों में उपलब्ध हैं। 16 दिसम्बर 1927 को बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा का आखिरी अध्याय (अन्तिम समय की बातें) पूर्ण करके जेल से बाहर भिजवा दिया। 18 दिसम्बर 1927 को माता-पिता से अन्तिम मुलाकात की और सोमवार 19 दिसम्बर 1927 को सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर गोरखपुर की जिला जेल में उन्हें फाँसी दे दी गयी। राम प्रसाद बिस्मिल और उनके जैसे लाखो क्रांतिकारियों के बलिदान का देश सद्येव ऋणी रहेगा! जय हिन्द !
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