खाश मित्रो में: *ह्र्दय रोगियों के दिलों में है मशीहा सेवानिवृत्त डॉ०राजीव चौधरी* रायबरेली, मृत्यु लोक पे ह्र्दय रोग अपना जाल इस तरह बिखेरता जारहा है कि मानव ह्र्दय रोग का 55% प्रतिशत लगभग शिकार हो शकंजे में है एसे में इक नाम ह्र्दय रोग चिकित्सक का जनपद रायबरेली में मशीहा के रुप मे उजागर हो चर्चा में है। डॉ०राजीव चौधरी (एम०डी०,वरि०ह्र्दय रोग विशेषज्ञ) "सेवानिवृत्त" वर्ष1988 से मरीज़ो की सेवाएं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में रहते हुए किया और 29 फरवरी 2020 को सेवानिवृत्त जिला चिकित्सालय पुरूष रायबरेली से हुव्ये जो वर्ष 2004 से वरिष्ठ परामर्शदाता के पद पे तैनात थे। जिनको ह्र्दय रोग से पीड़ित रोगी मशीहा कहते हैं जो ह्रदय रोग का उपचार करने में महार्थ रखते है। डॉ०राजीव चौधरी "ह्र्दय रोग विशेषज्ञ" के खाश मित्रो में नायाब अली लखनवी "वरिष्ठम पत्रकार",डॉ०एस०एस०पाण्डेय "निश्चेतक" है। कृत्य:नायाब टाइम्स


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Schi baat:*खरी बात * संस्कारी औरत का शरीर केवल उसका पति ही देख सकता है। लेकिन कुछ कुल्टा व चरित्रहीन औरतें अपने शरीर की नुमाइश दुनियां के सामने करती फिरती हैं। समझदार को इशारा ही काफी है। इस पर भी नारीवादी पुरुष और नारी दोनों, कहते हैं, कि यह पहनने वाले की मर्जी है कि वो क्या पहने। बिल्कुल सही, अगर आप सहमत हैं, तो अपने घर की औरतों को, ऐसे ही पहनावा पहनने की सलाह दें। हम तो चुप ही रहेंगे।
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दशरथ मांझी इक नाम:*भारत रत्न के असली हक़दार विहार के दशरथ मांझी हुए वंचित* विहार के गहलौर गांव के निवासी दशरथ मांझी बहुत ही गरीब परिवार से थे, दिन रात मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। गांव में आमदनी के स्रोत कम होने के कारण दशरथ मांझी यौवनावस्था में धनवाद में स्थित एक कोल फैक्ट्री में काम करने चले गए थे, धनवाद से वापस आने के बाद दशरथ मांझी के माता-पिता ने फागुनी देवी से विवाह करवा दिया, विवाह के उपरांत मांझी परिवार की जिम्मेदारी की बजह से धनवाद बापस जाकर फैक्ट्री में काम नही कर सका और अपने गाँव मे ही परिवार के साथ खेती किसानी करने लगे। एक दिन खेत मे काम करते समय फागुनी देवी के सर में चोट लग गयी जिसमें से काफी खून का बहाव हो रहा था,गहलौर से गया जाने के लिए घूम के जा रहे रास्ते की दूरी 55 किमी० थी जबकि गहलौर से सीधे रास्ते पर 110 मी० और 9 मी० चौड़े पहाड़ की बजह से रास्ता बंद था जिसकी दूरी मात्र 15 किमी० दूर थी, मजबूरी में गहलौर गाँव के निवासी 55 किमी० का लंबा रास्ता गया जाने के लिए करते थे। इसी बजह से मांझी भी अपनी पत्नी फागुनी देवी को 55 किमी० लंबे रास्ते से लेकर शहर गये थे, अस्पताल पहुचते पहुचते फागुनी देवी के सर से काफी खून बह जाने से उनकी म्रत्यु हो गयी। बेचारा मांझी बेसुध हो गया और बापस गांव आकर अपनी पत्नी का दाह संस्कार किया,उसके बाद मांझी ने उस विशाल पहाड़ को हटवाने के लिए शहर में बड़े बड़े नेताओ को अवगत कराया लेकिन किसी ने कुछ नही सुना,अंत मे मांझी ने छेनी और हथौड़ी से विशाल पहाड़ को हटाने का प्रण किया और घर से निकलकर अपना डेरा उसी पहाड़ पे पास बना लिया, 22 वर्ष के लगातार मेहनत के दौरान पूरा पहाड़ मांझी ने हटाकर रास्ता बना दिया इस वीच गाँव बालों ने तरह-तरह से मांझी का उपहास किया परंतु मेहनत की मिशाल कायम कर मांझी ने इतिहास रच दिया था, अब गाँव के सभी लोग शहर मात्र 15 किमी० का रास्ता तय करके पहुचने लगे थे, जब इसके बारे में सरकार को पता लगा तब विहार सरकार ने 2006 में दशरथ मांझी को पदम श्री से सम्मान किया परंतु भारत रत्न के हकदार मांझी भारत रत्न से बंचित रह गए, मांझी के गाल ब्लैडर में कैंसर होने की बजह से 2007 में मांझी ने अपने प्राण त्याग दिए। *कृत्य: नायाब टाइम्स*
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मुत्यु लोक का सच:*आचार्य रजनीश* (१) जब मेरी मृत्यु होगी तो आप मेरे रिश्तेदारों से मिलने आएंगे और मुझे पता भी नहीं चलेगा, तो अभी आ जाओ ना मुझ से मिलने। (२) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आप मेरे सारे गुनाह माफ कर देंगे, जिसका मुझे पता भी नहीं चलेगा, तो आज ही माफ कर दो ना। (३) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आप मेरी कद्र करेंगे और मेरे बारे में अच्छी बातें कहेंगे, जिसे मैं नहीं सुन सकूँगा, तो अभी कहे दो ना। (४) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आपको लगेगा कि इस इन्सान के साथ और वक़्त बिताया होता तो अच्छा होता, तो आज ही आओ ना। इसीलिए कहता हूं कि इन्तजार मत करो, इन्तजार करने में कभी कभी बहुत देर हो जाती है। इस लिये मिलते रहो, माफ कर दो, या माफी माँग लो। *मन "ख्वाईशों" मे अटका रहा* *और* *जिन्दगी हमें "जी "कर चली गई.*
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जनपद का नाम रौशन: *डिप्टी एसपी पद पर आरुषि का हुआ चयन* रायबरेली पीसीएस परीक्षा 2017 में डिप्टी एसपी पद पर चयनित होकर आरुषि मिश्रा ने जनपद का नाम रोशन किया। गौरतलब है कि इससे पूर्व आरुषि मिश्रा ने भारतीय वन सेवा परीक्षा 2018 में देश में दूसरा स्थान पाकर जनपद को गौरवान्वित किया था। आरुषि मिश्रा ने अपनी आरंभिक शिक्षा सेंट पीटर्स स्कूल और एसजेएस से पूर्ण की थी और आरुषि ने आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग करने के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में जाने का निर्णय लिया और अपने इस निर्णय को मूर्त रूप देने के लिए पढ़ाई शुरू कर दी। आरुषि का कहना है कि कड़ी मेहनत लगन आत्मविश्वास और बड़ों के आशीर्वाद से सफलता अवश्य मिलती है। बैलीगंज निवासी एडवोकेट अजय मिश्र और सेंट पीटर्स की शिक्षिका नीता मिश्रा की पुत्री आरुषि मिश्र अपनी इस सफलता का श्रेय माता-पिता के कुशल मार्गदर्शन परिवार के सहयोग और शिक्षकों को देती हैं। आरुषि मिश्र के मामा पत्रकार बी एन मिश्र का कहना है कि आरुषि बचपन से ही मेधावी थी और उसने आईसीएससी की दसवीं परीक्षा में भी जनपद में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। आरुषि की इस सफलता पर जनपदवासियों ने प्रशन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। कृत्य:नायाब टाइम्स
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यादों के सहारे है वाल्दैन के: मृत्यु लोक के सभी जीव जंतु पशु पक्षी प्राणियों को स्वस्थ शरीर एवं लम्बी उम्र दे खुदा *हार्दिक शुभकामनाएं/मुबारक* हो आज का दिन रब से ये दुआ है कि आपके परिवार में खुशियां ही खुशियाँ हो आमीन..! अपने अंदाज में मस्ती से रहा करता हूँ वो साथ हमारे हैं जो कुछ दूर चला करते हैं । हम आज है अपने वाल्देन मरहूम नवाब अली साहब के साथ.....!
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