Masatan: Mere Dil Aziz Assalamu Alaiqum Aadaab Salaam Allahu Akbar Allahu Akbar Alhamdulillah Allah Ne Na Baba Haji Mastan Ko Bete Se Mahroom Rakha Aur Na Sultan Raza Mastan Ko Baap ki Sarprasti Se Mera Aaj un Tamam Logo ko Jawab hai Jo Mere Bawa Haji Mastan ko Sirf Underworld Aur smuggler ki hi Nazar se Dekhte Hai Bawa ki Moujoodgi me Underworld ka Ayeena Yeh Nahi Tha Jo Aaj unke Na Hone ke Baad Samaj Dekh Raha hai J Media Aur Bollywood ne Godfather ki Image hi Change kar Rakhi hai BAWA GODFATHER SIRF Underworld tak hi nahi The Wo Greebo Mazloomon Muflison Besaharaon Yateemon Zulm o Sitam ke Maaron ke bhi Gothfather the Unhe Gareebon ke Mashiha Daanveer Muqaddar ka Sikandar Shahansha o ka Shahansha Betaaj Badshahse bhi Pukara jata hai Jisko Godfather kahte ho Unhone Apni puri Zindagi ke safar me Ameer she Lekar Fakir Bhikhari tak ko Gale Lagaya Apni Badshahi me Na Mulq ki Zami ko ganda hone diya Us dour me Dahshat gardi is Charam pe nahi thi Waba Ki Moujudgi me Bollywood filmon ne kya msg diya Deewar Cooli Shahansha Betaaj Badshah etc Once Upon A Time In Mumbai Ke jariye ekbaar fir Image ko khatam karne ki koshish ki JA Rahi thi jisme Bade Gjarano Ka hath tha Takhlif yeh thi Longo ko ki Mastan Mar ke bhi Amar hai Humne Lambe samay tak Balaji Production ke sath Waba ki Image ko lekar legal ladai ki Maine puri family ko is Subject pe Razi kar Evidence Daleel tayyar kar Advo .Majid Memon sahab se Notice jaari karaya Memon Sahab ne Meri Baat Ka maan Rakha Aur Mere Mamle me Apni Moujudgi Darj ki Bahoot Shukar guzaar hu me unke is Kadam ne Film ki Script ko Turn kiya Humne Kaha Haji Mastan Bollywood ki Jaagir nahi koi bhi Cash karega Underworld ko Jarurat hogi Negatively ki Dawood Bhai ke career ko Bollywood Darshata hai Unki Family Objection nahi leti yeh unka Subject hai Gawli Bhai ke Career pe Film Bane Aapatti na ho pariwar ko yeh unka mamla hai Hum Waba ki image se nahi khelne denge Worldwide Agitation hoga Kanooni Dayre me hoga Bawa ke Aaj bhi Croydon Chahne wale hai Worldwide Cinema gharon Ka Sarkari Sampatti ka Jo nukshan hoga uski Bharpayi Balaji Teli Film Karegi Iske jimmedar him nahi honge Uske bad Jo film Parde pe Aai Behtar thi Disclaimer pe likha gaya yeh film Haji Mastan pe Adharit Nahi hai Kahna yeh hai Hume Ek hi Chashme se Na dekha Jay Hume Bhi utni hi Mohabbat hai is mulq ki Mitti Aur Insaan se ke Jitni Aap ko hai Hum bhi Mulq ke Aman o Amaan Ka hissa hai Bazooyon ke jor pe Huqumat nahi Chalti Aur Na Baadshah ho Jaate Baadshah to WO hai Jo Dilon pe Raaj karta hai Aur wo Hai MASTAN Mastan Mara nahi Mastan to Abhi Zinda hai Ek Dil E Mastan Tha Jise Tere Bad Sada hum Dhoonte Rahe Ek Daaman E Mastan hai Jo Raha Sada Zindagi ke sath Bawa Teri Goad Bosha E Daaman Ka kuchh Aisa Hai Asar Hazaron Toofaan Hokar Guzre Par Phika Na Pada Dua Me Yaad Rakhna Aapka Apna Sultan Raza Mastan


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*--1918 में पहली बार इस्तेमाल हुआ ''हिन्दू'' शब्द !--* *तुलसीदास(1511ई०-1623ई०)(सम्वत 1568वि०-1680वि०)ने रामचरित मानस मुगलकाल में लिखी,पर मुगलों की बुराई में एक भी चौपाई नहीं लिखी क्यों ?* *क्या उस समय हिन्दू मुसलमान का मामला नहीं था ?* *हाँ,उस समय हिंदू मुसलमान का मामला नहीं था क्योंकि उस समय हिन्दू नाम का कोई धर्म ही नहीं था।* *तो फिर उस समय कौनसा धर्म था ?* *उस समय ब्राह्मण धर्म था और ब्राह्मण मुगलों के साथ मिलजुल कर रहते थे,यहाँ तक कि आपस में रिश्तेदार बनकर भारत पर राज कर रहे थे,उस समय वर्ण व्यवस्था थी।तब कोई हिन्दू के नाम से नहीं जाति के नाम से पहचाना जाता था।वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य से नीचे शूद्र था सभी अधिकार से वंचित,जिसका कार्य सिर्फ सेवा करना था,मतलब सीधे शब्दों में गुलाम था।* *तो फिर हिन्दू नाम का धर्म कब से आया ?* *ब्राह्मण धर्म का नया नाम हिन्दू तब आया जब वयस्क मताधिकार का मामला आया,जब इंग्लैंड में वयस्क मताधिकार का कानून लागू हुआ और इसको भारत में भी लागू करने की बात हुई।* *इसी पर ब्राह्मण तिलक बोला था,"क्या ये तेली, तम्बोली,कुणभठ संसद में जाकर हल चलायेंगे,तेल बेचेंगे ? इसलिए स्वराज इनका नहीं मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है यानि ब्राह्मणों का। हिन्दू शब्द का प्रयोग पहली बार 1918 में इस्तेमाल किया गया।* *तो ब्राह्मण धर्म खतरे में क्यों पड़ा ?* *क्योंकि भारत में उस समय अँग्रेजों का राज था,वहाँ वयस्क मताधिकार लागू हुआ तो फिर भारत में तो होना ही था।* *ब्राह्मण की संख्या 3.5% हैं,अल्पसंख्यक हैं तो राज कैसे करेंगे ?* *ब्राह्मण धर्म के सारे ग्रंथ शूद्रों के विरोध में,मतलब हक-अधिकार छीनने के लिए,शूद्रों की मानसिकता बदलने के लिए षड़यंत्र का रूप दिया गया।* *आज का OBC ही ब्राह्मण धर्म का शूद्र है। SC (अनुसूचित जाति) के लोगों को तो अछूत घोषित करके वर्ण व्यवस्था से बाहर रखा गया था।* *ST (अनुसूचित जनजाति) के लोग तो जंगलों में थे उनसे ब्राह्मण धर्म को क्या खतरा ? ST को तो विदेशी आर्यों ने सिंधु घाटी सभ्यता संघर्ष के समय से ही जंगलों में जाकर रहने पर मजबूर किया उनको वनवासी कह दिया।* *ब्राह्मणों ने षड़यंत्र से हिन्दू शब्द का इस्तेमाल किया जिससे सबको को समानता का अहसास हो लेकिन ब्राह्मणों ने समाज में व्यवस्था ब्राह्मण धर्म की ही रखी।जिसमें जातियाँ हैं,ये जातियाँ ही ब्राह्मण धर्म का प्राण तत्व हैं, इनके बिना ब्राह्मण का वर्चस्व खत्म हो जायेगा।* *इसलिए तुलसीदास ने मुसलमानों के विरोध में नहीं शूद्रों के विरोध में शूद्रों को गुलाम बनाए रखने के लिए लिखा !* *"ढोल गंवार शूद्र पशु नारी।ये सब ताड़न के अधिकारी।।"* *अब जब मुगल चले गये,देश में OBC-SC के लोग ब्राह्मण धर्म के विरोध में ब्राह्मण धर्म के अन्याय अत्याचार से दुखी होकर इस्लाम अपना लिया था* *तो अब ब्राह्मण अगर मुसलमानों के विरोध में जाकर षड्यंत्र नहीं करेगा तो OBC,ST,SC के लोगों को प्रतिक्रिया से हिन्दू बनाकर,बहुसंख्यक लोगों का हिन्दू के नाम पर ध्रुवीकरण करके अल्पसंख्यक ब्राह्मण बहुसंख्यक बनकर राज कैसे करेगा ?* *52% OBC का भारत पर शासन होना चाहिये था क्योंकि OBC यहाँ पर अधिक तादात में है लेकिन यहीं वर्ग ब्राह्मण का सबसे बड़ा गुलाम भी है। यहीं इस धर्म का सुरक्षाबल बना हुआ है,यदि गलती से भी किसी ने ब्राह्मणवाद के खिलाफ आवाज़ उठाई तो यहीं OBC ब्राह्मणवाद को बचाने आ जाता है और वह आवाज़ हमेशा के लिये खामोश कर दी जाती है।* *यदि भारत में ब्राह्मण शासन व ब्राह्मण राज़ कायम है तो उसका जिम्मेदार केवल और केवल OBC है क्योंकि बिना OBC सपोर्ट के ब्राह्मण यहाँ कुछ नही कर सकता।* *OBC को यह मालूम ही नही कि उसका किस तरह ब्राह्मण उपयोग कर रहा है, साथ ही साथ ST-SC व अल्पसंख्यक लोगों में मूल इतिहास के प्रति अज्ञानता व उनके अन्दर समाया पाखण्ड अंधविश्वास भी कम जिम्मेदार नही है।* *ब्राह्मणों ने आज हिन्दू मुसलमान समस्या देश में इसलिये खड़ी की है कि तथाकथित हिन्दू (OBC,ST,SC) अपने ही धर्म परिवर्तित भाई मुसलमान,ईसाई से लड़ें,मरें क्योंकि दोनों ओर कोई भी मरे फायदा ब्राह्मणों को ही हैं।* *क्या कभी आपने सुना है कि किसी दंगे में कोई ब्राह्मण मरा हो ? जहर घोलनें वाले कभी जहर नहीं पीते हैं।*
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प०राम प्रसाद बिस्मिल जी हज़रो नमन: *“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” : कब और कैसे लिखा राम प्रसाद बिस्मिल ने यह गीत!* राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ का नाम कौन नहीं जानता। बिस्मिल, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दे दी। वे मैनपुरी षडयंत्र व काकोरी-कांड जैसी कई घटनाओं मे शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सदस्य भी थे। भारत की आजादी की नींव रखने वाले राम प्रसाद जितने वीर, स्वतंत्रता सेनानी थे उतने ही भावुक कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार व साहित्यकार भी थे। बिस्मिल उनका उर्दू उपनाम था जिसका हिन्दी में अर्थ होता है ‘गहरी चोट खाया हुआ व्यक्ति’। बिस्मिल के अलावा वे राम और अज्ञात के नाम से भी लेख व कवितायें लिखते थे। *राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ की तरह अशफ़ाक उल्ला खाँ भी बहुत अच्छे शायर थे। एक रोज का वाकया है अशफ़ाक, आर्य समाज मन्दिर शाहजहाँपुर में बिस्मिल के पास किसी काम से गये। संयोग से उस समय अशफ़ाक जिगर मुरादाबादी की यह गजल गुनगुना रहे थे* “कौन जाने ये तमन्ना इश्क की मंजिल में है। जो तमन्ना दिल से निकली फिर जो देखा दिल में है।।” बिस्मिल यह शेर सुनकर मुस्करा दिये तो अशफ़ाक ने पूछ ही लिया- “क्यों राम भाई! मैंने मिसरा कुछ गलत कह दिया क्या?” इस पर बिस्मिल ने जबाब दिया- “नहीं मेरे कृष्ण कन्हैया! यह बात नहीं। मैं जिगर साहब की बहुत इज्जत करता हूँ मगर उन्होंने मिर्ज़ा गालिब की पुरानी जमीन पर घिसा पिटा शेर कहकर कौन-सा बड़ा तीर मार लिया। कोई नयी रंगत देते तो मैं भी इरशाद कहता।” अशफ़ाक को बिस्मिल की यह बात जँची नहीं; उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा- “तो राम भाई! अब आप ही इसमें गिरह लगाइये, मैं मान जाऊँगा आपकी सोच जिगर और मिर्ज़ा गालिब से भी परले दर्जे की है।” *उसी वक्त पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने यह शेर कहा* “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-कातिल में है?” यह सुनते ही अशफ़ाक उछल पड़े और बिस्मिल को गले लगा के बोले- “राम भाई! मान गये; आप तो उस्तादों के भी उस्ताद हैं।” आगे जाकर बिस्मिल की यह गज़ल सभी क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की गाड़ी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढ़ाते हुए और अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए एक साथ गाया करते थे। बिस्मिल की शहादत के बाद उनका यह गीत क्रान्तिकारियों के लिए मंत्र बन गया था। न जाने कितने क्रांतिकारी इसे गाते हुए हँसते-हँसते फांसी पर चढ़ गए थे। पढ़िए राम प्रसाद बिस्मिल द्वारा लिखा गया देशभक्ति से ओतप्रोत यह गीत – सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ! हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है? एक से करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है। रहबरे-राहे-मुहब्बत! रह न जाना राह में, लज्जते-सेहरा-नवर्दी दूरि-ए-मंजिल में है। अब न अगले वल्वले हैं और न अरमानों की भीड़, एक मिट जाने की हसरत अब दिले-‘बिस्मिल’ में है । ए शहीद-ए-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफ़िल में है। खींच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद, आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? है लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर, और हम तैयार हैं सीना लिये अपना इधर। खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हाथ जिनमें हो जुनूँ , कटते नही तलवार से, सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से, और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है , सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हम तो निकले ही थे घर से बाँधकर सर पे कफ़न, जाँ हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम। जिन्दगी तो अपनी महमाँ मौत की महफ़िल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। यूँ खड़ा मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार, “क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?” सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब, होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज। दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है! सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। जिस्म वो क्या जिस्म है जिसमें न हो खूने-जुनूँ, क्या वो तूफाँ से लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है। पं० राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ उनके इस लोकप्रिय गीत के अलावा ग्यारह वर्ष के क्रान्तिकारी जीवन में बिस्मिल ने कई पुस्तकें भी लिखीं। जिनमें से ग्यारह पुस्तकें ही उनके जीवन काल में प्रकाशित हो सकीं। ब्रिटिश राज में उन सभी पुस्तकों को ज़ब्त कर लिया गया था। पर स्वतंत्र भारत में काफी खोज-बीन के पश्चात् उनकी लिखी हुई प्रामाणिक पुस्तकें इस समय पुस्तकालयों में उपलब्ध हैं। 16 दिसम्बर 1927 को बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा का आखिरी अध्याय (अन्तिम समय की बातें) पूर्ण करके जेल से बाहर भिजवा दिया। 18 दिसम्बर 1927 को माता-पिता से अन्तिम मुलाकात की और सोमवार 19 दिसम्बर 1927 को सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर गोरखपुर की जिला जेल में उन्हें फाँसी दे दी गयी। राम प्रसाद बिस्मिल और उनके जैसे लाखो क्रांतिकारियों के बलिदान का देश सद्येव ऋणी रहेगा! जय हिन्द !
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यार: यारो के यार डॉ०एन०के०श्रीवास्तव "आज का दिन 2004 की दोस्ती के नाम मृत्यु लोक पे जिओ सालो साल ये रब से दुआ है दोस्त...!" Wishing you all a Merry Christmas🎅🏻 in adv.... !
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एआरएम एटा डिपो : *मदनलाल (स०क्षे०प्र०) एटा पर डिपो के कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार के लगाए गम्भीर आरोप* *एटा* उत्तर प्रदेश परिवहन निगम एटा डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक मदनलाल पर चालको व परिचालकों ने अवैध उगाई के गम्भीर आरोप लगाते हुए आज चक्का जाम की स्थिति वना दी । जिसमें चालको परिचालकों ने डिपो में सुबह से ही डिपो के अंदर कार्य का बहिष्कार एकत्रित हो चक्का जाम की तैयारी करते हुए वही पर ए०आर०एम० मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे और आंदोलन कारी यही तक नही रुके उन्होंने ए आर एम व सीनियर फोरमेन पर अनगिनत भ्र्ष्टाचार के बहुत संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि एटा ए०आर०एम०व फोरमेन इस हद तक गिर चुके है कि अगर बस में कही पंचर हो जाये तो उस पैसे तक की चालक व परिचालक की रिकवरी करा दी जाती है । क्या ऐसे अधिकारी की सोच कहा तक जा सकती है यह आप स्वयं समझ सकते है । वही पर लगाये आरोपो में कहा कि ए०आर०एम० व सीनियर फोरमैन को डिपो से कोई मतलब नही है चाहे परिवहन विभाग को मुनाफा हो या न हो मगर दोनों अधिकारियों को अपने मुनाफे से मतलव है वही पर डिपो में ठेके पर कार्य कर रहे मजदूर मिस्त्री ने भी वताया कि वर्कशाप में ठेके पर कार्य करने वाले ठेकेदार अलीगढ़ के है वो वहा से मजदूरों का पैसा फोरमैन के खाते में भेजते हैं मगर फोरमैन उस पैसे की कटौती कर मजदूर मिस्त्रियों को देते है वो भी चार महीनों में एक महीने का । यह दोनों अधिकारी डिपो में लूट मचाये हुए है । वही पर आक्रोशित आंदोलन कारी यही तक नही रुके उन्होने ए०आर०एम० मुर्दाबाद के जोर जोर से नारे भी लगाए । इसी बीच पूर्व विधायक टीटू यादव व समाज वादी पार्टी जिला अध्यक्ष असरफ हुसैन ने चालक परिचालकों को समझा बुझाकर मामला शान्त कराया । फिरआंदोलन कारी अपने कार्य पर लौटने को राजी हुए । *नायाब टाइम्स*
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डॉ०कफील खान ने की प्रियंका गाँधी से मुलाकात: *महासचिव प्रियंका गांधी से कफ़ील खान ने की मुलाकात* दिल्ली,जेल से रिहाई के बाद डॉ०कफ़ील खान ने आज कांग्रेस की महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी से किया मुलाकात। डॉ०कफ़ील खान की जेल से रिहाई के बाद कांग्रेस महासचिव ने कफ़ील खान और उनके परिजनों से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल लिया था और हर संभव मदद का वादा किया था। *कफ़ील खान ने अपने परिवार के साथ की कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात* दिल्ली, में डॉक्टर कफ़ील खान अपने परिवार के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जी से मुलाकात की। डॉक्टर कफ़ील के साथ उनकी पत्नी और बच्चे भी प्रियंका गांधी से मिले। दिल्ली में हुई इस मुलाकात के वक्त यूपी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और अल्पसंख्यक कांग्रेस के चेयरमैन शाहनवाज आलम मौजूद थे। *कांग्रेस ने चलाया था डॉक्टर कफ़ील की रिहाई के लिए अभियान* उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने डॉक्टर कफ़ील की रिहाई के लिए एक बड़ा अभियान चलाया था। पूरे सूबे में हस्ताक्षर अभियान, विरोध प्रदर्शन और पत्र लिखकर कांग्रेसियों ने डॉक्टर कफ़ील खान की रिहाई के लिए आवाज़ बुलंद की थी। कृत्य:नायाब टाइम्स
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