आर०यू०पाण्डेय जी की पुण्यतिथि: *पुण्यतिथि पर फार्मेसिस्टों ने स्व राम उजागिर पांडेय के सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लिया* .. *डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसो के संस्थापक स्व राम उजागिर पांडेय 'फार्मेसी रत्न' की 17वीं पुण्य तिथि पर रक्तदान, सेमिनार, श्रद्धांजलि सभा सहित विभिन्न कार्यक्रम आज सम्पन्न* । *व्यक्ति नही संस्था थे, राम उजागिर पांडेय-सुनील यादव* लखनऊ,डॉ०श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय पार्क रोड लखनऊ में दिनांक 6,जुलाई 2020 को डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के संस्थापक महामंत्री 'फार्मेसी रत्न' स्व राम उजागिर पांडेय की 17 वी पुण्यतिथि पर आज प्रदेश के फार्मेसिस्टों ने उनके बताए सिद्धांतो पर चलने का संकल्प लिया । *लखनऊ में संघ के पूर्व महामंत्री डॉ के के सचान ने आज 17वीं बार रक्तदान कर श्रद्धांजलि अर्पित की* लखनऊ,डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय (सिविल) लखनऊ में राजकीय फार्मेसिस्ट महासंघ के अध्यक्ष *सुनील यादव की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि सभा की गई*, प्रभारी अधिकारी फार्मेसी श्री ए एन द्विवेदी, वरिष्ठ चीफ फार्मेसिस्ट एच एन चौधरी ने स्व पांडेय जी के चित्र पर माल्यार्पण कर सभा का शुभारंभ किया । सभी चीफ फार्मेसिस्टों, फार्मेसिस्टों, लैब टेक्नीशियन,एक्स रे टेक्नीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, कार्यालय स्टाफ,नर्सेस, वार्ड बॉय, सफाई कर्मियों ने भी पुष्प अर्पित कर स्व पांडेय जी को याद किया । कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वी पी मिश्र ने पांडेय जी के साथ बिताए क्षणों को याद करते हुए उन्हें राज्य कर्मचारियों का मसीहा बताया । उन्होंने कहा कि स्व पांडेय जी कर्मचारियों में लोकप्रिय नेता थे, प्रदेश के कर्मचारियों को एकजुट करने में पांडेय जी की भूमिका हमेशा यादगार रहेगी । राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत, महामंत्री अतुल मिश्र ने स्व पांडेय को संघर्षो का प्रतीक बताया और श्रद्धांजलि दी । स्व पांडेय जी ने फार्मेसी छात्रों को एकजुट करके संघर्ष की शुरुवात की थी और डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन का गठन किया था । सतत संघर्ष करते हुए फार्मासिस्ट संवर्ग में चीफ फार्मेसिस्ट से लेकर संयुक्त निदेशक तक के पद सृजित कराये । राजकीय फार्मेसिस्ट महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव ने स्व पांडेय जी को एक कुशल रणनीतिकार के साथ अच्छा साहित्यकार भी बताया । उन्होंने कहा कि पांडेय जी द्वारा लिखे गए पत्रो का संकलन करने से संघ को बहुत लाभ हुआ है । महासंघ के जनपद अध्यक्ष एस एन सिंह, सचिव जी सी दुबे, राज्य कर्मचारी संययुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष सुभाष श्रीवास्तव, प्रवक्ता अजय पांडेय , वन विभाग के डॉ पी के सिंह, अनिल प्रताप सिंह, अजय कश्यप, आर एन यादव, पंकज रस्तोगी, शिव जी कुशवाहा, रजनीश पांडेय, एम पी चौधरी आदि ने पुष्प अर्पित करते हुए कर्मचारियों से एकजुट रहकर पांडेय जी के बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया । रमेश यादव, विवेक, गिरीश विश्वकर्मा , सत्य प्रकाश यादव, जावेद, फ़ैज़ी, राजेश सिंह, खुर्शीद, रियाज, राजेन्द्र दुबे, आदि ने प्रमुख रूप से सभा को संबोधित कर पांडेय जी को याद किया । वहीं प्रदेश के अन्य जनपदों में भी स्व पांडेय जी की पुण्यतिथि पर रक्तदान, सेमिनार , फल वितरण सहित अनेक जनोपयोगी कार्यक्रमो का आयोजन किया गया । ज्ञातव्य है कि कर्मचारी नेता राम उजागिर पांडेय का 6 जुलाई 2003 को एक सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन हो गया था । तब से हर वर्ष पूरे प्रदेश में उन्हें 6 जुलाई को श्रद्धांजलि अर्पित कर याद किया जाता है । कृत्य:नायाब टाइम्स


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मुत्यु लोक का सच:*आचार्य रजनीश* (१) जब मेरी मृत्यु होगी तो आप मेरे रिश्तेदारों से मिलने आएंगे और मुझे पता भी नहीं चलेगा, तो अभी आ जाओ ना मुझ से मिलने। (२) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आप मेरे सारे गुनाह माफ कर देंगे, जिसका मुझे पता भी नहीं चलेगा, तो आज ही माफ कर दो ना। (३) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आप मेरी कद्र करेंगे और मेरे बारे में अच्छी बातें कहेंगे, जिसे मैं नहीं सुन सकूँगा, तो अभी कहे दो ना। (४) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आपको लगेगा कि इस इन्सान के साथ और वक़्त बिताया होता तो अच्छा होता, तो आज ही आओ ना। इसीलिए कहता हूं कि इन्तजार मत करो, इन्तजार करने में कभी कभी बहुत देर हो जाती है। इस लिये मिलते रहो, माफ कर दो, या माफी माँग लो। *मन "ख्वाईशों" मे अटका रहा* *और* *जिन्दगी हमें "जी "कर चली गई.*
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प०राम प्रसाद बिस्मिल जी हज़रो नमन: *“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” : कब और कैसे लिखा राम प्रसाद बिस्मिल ने यह गीत!* राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ का नाम कौन नहीं जानता। बिस्मिल, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दे दी। वे मैनपुरी षडयंत्र व काकोरी-कांड जैसी कई घटनाओं मे शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सदस्य भी थे। भारत की आजादी की नींव रखने वाले राम प्रसाद जितने वीर, स्वतंत्रता सेनानी थे उतने ही भावुक कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार व साहित्यकार भी थे। बिस्मिल उनका उर्दू उपनाम था जिसका हिन्दी में अर्थ होता है ‘गहरी चोट खाया हुआ व्यक्ति’। बिस्मिल के अलावा वे राम और अज्ञात के नाम से भी लेख व कवितायें लिखते थे। *राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ की तरह अशफ़ाक उल्ला खाँ भी बहुत अच्छे शायर थे। एक रोज का वाकया है अशफ़ाक, आर्य समाज मन्दिर शाहजहाँपुर में बिस्मिल के पास किसी काम से गये। संयोग से उस समय अशफ़ाक जिगर मुरादाबादी की यह गजल गुनगुना रहे थे* “कौन जाने ये तमन्ना इश्क की मंजिल में है। जो तमन्ना दिल से निकली फिर जो देखा दिल में है।।” बिस्मिल यह शेर सुनकर मुस्करा दिये तो अशफ़ाक ने पूछ ही लिया- “क्यों राम भाई! मैंने मिसरा कुछ गलत कह दिया क्या?” इस पर बिस्मिल ने जबाब दिया- “नहीं मेरे कृष्ण कन्हैया! यह बात नहीं। मैं जिगर साहब की बहुत इज्जत करता हूँ मगर उन्होंने मिर्ज़ा गालिब की पुरानी जमीन पर घिसा पिटा शेर कहकर कौन-सा बड़ा तीर मार लिया। कोई नयी रंगत देते तो मैं भी इरशाद कहता।” अशफ़ाक को बिस्मिल की यह बात जँची नहीं; उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा- “तो राम भाई! अब आप ही इसमें गिरह लगाइये, मैं मान जाऊँगा आपकी सोच जिगर और मिर्ज़ा गालिब से भी परले दर्जे की है।” *उसी वक्त पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने यह शेर कहा* “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-कातिल में है?” यह सुनते ही अशफ़ाक उछल पड़े और बिस्मिल को गले लगा के बोले- “राम भाई! मान गये; आप तो उस्तादों के भी उस्ताद हैं।” आगे जाकर बिस्मिल की यह गज़ल सभी क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की गाड़ी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढ़ाते हुए और अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए एक साथ गाया करते थे। बिस्मिल की शहादत के बाद उनका यह गीत क्रान्तिकारियों के लिए मंत्र बन गया था। न जाने कितने क्रांतिकारी इसे गाते हुए हँसते-हँसते फांसी पर चढ़ गए थे। पढ़िए राम प्रसाद बिस्मिल द्वारा लिखा गया देशभक्ति से ओतप्रोत यह गीत – सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ! हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है? एक से करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है। रहबरे-राहे-मुहब्बत! रह न जाना राह में, लज्जते-सेहरा-नवर्दी दूरि-ए-मंजिल में है। अब न अगले वल्वले हैं और न अरमानों की भीड़, एक मिट जाने की हसरत अब दिले-‘बिस्मिल’ में है । ए शहीद-ए-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफ़िल में है। खींच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद, आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? है लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर, और हम तैयार हैं सीना लिये अपना इधर। खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हाथ जिनमें हो जुनूँ , कटते नही तलवार से, सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से, और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है , सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हम तो निकले ही थे घर से बाँधकर सर पे कफ़न, जाँ हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम। जिन्दगी तो अपनी महमाँ मौत की महफ़िल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। यूँ खड़ा मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार, “क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?” सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब, होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज। दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है! सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। जिस्म वो क्या जिस्म है जिसमें न हो खूने-जुनूँ, क्या वो तूफाँ से लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है। पं० राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ उनके इस लोकप्रिय गीत के अलावा ग्यारह वर्ष के क्रान्तिकारी जीवन में बिस्मिल ने कई पुस्तकें भी लिखीं। जिनमें से ग्यारह पुस्तकें ही उनके जीवन काल में प्रकाशित हो सकीं। ब्रिटिश राज में उन सभी पुस्तकों को ज़ब्त कर लिया गया था। पर स्वतंत्र भारत में काफी खोज-बीन के पश्चात् उनकी लिखी हुई प्रामाणिक पुस्तकें इस समय पुस्तकालयों में उपलब्ध हैं। 16 दिसम्बर 1927 को बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा का आखिरी अध्याय (अन्तिम समय की बातें) पूर्ण करके जेल से बाहर भिजवा दिया। 18 दिसम्बर 1927 को माता-पिता से अन्तिम मुलाकात की और सोमवार 19 दिसम्बर 1927 को सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर गोरखपुर की जिला जेल में उन्हें फाँसी दे दी गयी। राम प्रसाद बिस्मिल और उनके जैसे लाखो क्रांतिकारियों के बलिदान का देश सद्येव ऋणी रहेगा! जय हिन्द !
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ब्रज घात:यूपी में आकाशीय बिजली से 24लोगों की मौत! लखनऊ। उत्तर प्रदेश में रविवार की शाम को आये आंधी और आकाशीय बिजली से सत्रह लोगों की मौत हो गयी। कानपुर में 8, झांसी में 5, फतेहपुर में 5, हमीरपुर में 3, चित्रकूट, जालौन और गाजीपुर में 1-1 व्यक्ति की मौत की सूचना है। उत्तर प्रदेश में आज अबतक 23 लोगों की मौत की जानकारी मिली है। कानपुर के घाटमपुर, सतेजी और कशमण्डा क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरी। खेत मे काम कर रहे लोग एक पेड़ के नीचे छिप कर भीगने से बचने की कोशिश कर रहे थे तभी पेड़ पर बिजली गिर गयी। जिसमें चार किसान मजदूरों की मौत हो गयी।मरने वालों में दो-पुरुष, दो महिला थीं  शेष चार लोग खेतों ने आकाशीय बिजली गिरने से जान गंवाये। पिछले दिनों भी यूपी में आकाशीय बिजली से दर्जन भर से ज्यादा मौतें हुई थीं। राहत आयुक्त उत्तर प्रदेश ने इस आपदा में मरने वाले सभी मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता का ऐलान किया है।यह राशि जिला आपदा राहत कोष के माध्यम से दिया जाएगा। सभी मृतकों के शव को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आकाशीय बिजली से मरने की घटना पर शोक व्यक्त करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त किया है।
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निर्माण शौचालय का निरीक्षण: *डीएम ने ब्लाक सताव के निर्माणाधीन सामुदायिक शौचालयों का किया निरीक्षण; निर्माण कार्यो में गुणवत्ता, मानक व समयबद्धता पर दे विशेष ध्यान: वैभव श्रीवास्तव* रायबरेली,जनपद के तेजतर्रार कर्मठ जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने ब्लाक सतांव के चंदौली व बथुआ की ग्रामों में बनाये जा रहे सामुदायिक शौचालयों का निरीक्षण कर उनकी गुणवत्ता आदि देखा उन्होंने बथुआ में समुदायिक शौचालय बनने में गति धीमी पाये जाने पर सम्बन्धित ग्राम प्रधान, सचिव व खण्ड विकास अधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए सम्बन्धित ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार आदि को सीज करने के निर्देश देने के साथ ही सचिव का स्थाई रूप से वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारी को दिये। उन्होंने कहा कि सामुदायिक शौचालयों को निर्माण सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं वाले कार्यो में से है जिसमें मानक व गुणवत्ता एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए। कार्यो में किसी भी प्रकार की ढिलाई व शिथिलता किसी भी स्तर पर क्षम्य नही होगी। इसी क्रम में डीएम ने निर्माणाधीन हो रही नाली को देखा तथा सम्बन्धित अधिकारियों को उचित दिशा निर्देश दिये। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल, जिला पंचायत राज अधिकारी उपेन्द्र राज सिंह, प्रधान, बीडीओं राजेश सिंह, सचिव संत सरण उपस्थित थे। कृत्य:नायाब टाइम्स
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यौमे पैदाइश की मुबारकबाद आरिज़: *"यौमे पैदाइश"1,अक्टूबर 2020 के मौके पर आरिज़ अली को तहेदिल से मुबारकबाद* रायबरेली,आज हमारे पौत्र आरिज़ अली पुत्र नौशाद अली के योमे पैदाइश का दिन 1अक्टूबर 2020 है । जिसकी खुशी में उसे तहेदिल से *मुबारकबाद* "हैप्पी बर्थडे" आरिज़ अली । दोस्तो आप सब गुजरीस है के आप उसको अपनी दुवाओ से भी नवाज़े। *हैप्पी बर्थडे* आरिज़ अली....!🎂💐 नायाब अली लखनवी सम्पादक "नायाब टाइम्स" *अस्लामु अलैकुम/शुभप्रभात* हैप्पी गुरुवार
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