आयुर्वेद यूनानी औषधियों: *राजकीय आयुवैदिक चिकित्सालय में राष्ट्रीय पोषण माह जागरूकता शिविर का आयोजन पोषण तत्व की कमी ही बीमारियों का मुख्य कारण,खान-पान में पोषण तत्वों की करे बढ़ोतरी राष्ट्रीय पोषण माह उद्देश्य अच्छे पोषण व जानकारियों से स्वस्थ समाज के साथ ही सबका साथ-सबका विकास सबका विश्वास है उद्देश्य* रायबरेली,आज दिनाँक-18 सितम्बर, 2020 को शासन द्वारा दिये गये निर्देशो के अनुपालन में राष्ट्रीय पोषण माह सितम्बर 2020 के दौरान जनपद, विकास खण्डों आदि में पोषण जागरूकता कार्यक्रम निरन्तर चलाया जा रहा है। जनपद में सैम/मैम बच्चों की पहचान संदर्भन और प्रबंधन हेतु डिजिटल संवेदीकरण किया जा रहा है। सैम/मैम बच्चों की पहचान के लिए स्क्रीन किये जाने के पश्चात चिकित्सीय जटिलता वाले बच्चों को सीएचसी/पीएचसी पर उपचार करने के निर्देश दिये गये है। ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस उपकेन्द्र पर एएनएम आंगनबाड़ी कार्यकत्री व आशा के माध्यम से हाथ धुलाई व आर0आर0एस0 विधि बनाने का प्रदर्शन किया जा रहे है। प्रोषण माह के दौरान पौधारोपण व पोषण वाटिका, शिशु को 6-8 माह के बच्चों में स्तनपान एवं ऊपरी आहार का प्रोत्साहन किये जाने के साथ ही आयुवैदिक चिकित्सालय द्वारा काढ़ा भी वितरित किया जा रहा है। जनपद में चल रहे पोषण माह में राजकीय आयुवैदिक चिकित्सालय व योग वेलनेस सेन्टर द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में योग्य विशेषज्ञ डा0 रवि प्रताप सिंह व क्षेत्रीय आयुवैदिक युनानी अधिकारी डा0 अरूण कुमार कुरील द्वारा महिलाओं को स्वस्थ व स्वच्छ रहने की जानकारी देने के साथ ही शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अच्छे पोषण की जरूरत आदि पर विशेष जाकारियां भी दी गई। सोशल डिस्टेसिंग व मास्क का प्रयोग करते हुए कार्यक्रम का शुभारम्भ सहायक निदेशक सूचना प्रमोद कुमार द्वारा धन्वत्रि के चित्र पर माल्यापर्ण के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि सितम्बर माह में चलाये जा रहे राष्ट्रीय पोषण माह के लिए आमजनमानस, महिलाओं, किशोरियो आदि को जन आंनदोलन के रूप में जागरूक किया जाये तथा पोषण वाटिका व कुपोषित बच्चों की देखभाल, काढ़ा से कैसे शरीर की इम्युनिटी बढ़ानें में कारगर है आदि पर विशेष निरन्तर चर्चा की जाये। किशोरियों को एनीमिया की रोकथाम के लिए स्कूल न जाने वाली किशोरियो को नीली आयरन की गोलियों का वितरण, सेवन व स्वास्थ्य एवं पोषण देखभाल पर परमर्श भी दिये जाने के साथ-साथ खान-पान के प्रति जागरूक भी किया जाये। केन्द्र के प्रभारी आयुवैदिक चिकित्साधिकारी डा0 संजय कुमार सिंह ने भी राष्ट्रीय पोषण माह का महत्व बताते हुए कहा कि रोगों को मूल्य कारण आहार की गड़बड़ी, अनुचित विहार, नकारत्मक चिंतन, दमनात्मक औषधियां, श्रमहीन जीवन एवं मानसिक तनाव है। जिसके कारण मल, रक्त, नाड़ी, मन, बुद्धि विकास होता है। विकारों को दूर करने के लिए आहार योग-योग चिकित्सा, ध्यान योग- प्राकृतिक चिकित्सा, संयम योग- घरेलू बनौषधि चिकित्सा, व्यायाम योग- एक्यूप्रेशर चिकित्सा, सोधन योग- मैगनेट चिकित्सा आदि से दूर किया जा सकता है। इसके अलावा योग व व्ययाम, ध्यान तथा श्रम करने व पोषण युक्त खान-पान से शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के साथ ही अनेक रोगों को दूर कर स्वस्थ रहा जा सकता है। आयुवैदिक चिकित्सालय में क्षेत्रीय आयुवैदिक यूनानी अधिकारी डा0 अरूण कुमार कुरील, योग विशेषज्ञ डा0 रवि प्रताप सिंह, एडी सूचना प्रमोद कुमार, केन्द्र के चिकित्सक डा0 संजय कुमार सिंह, भारत विकास परिषद के नवल किशोर बाजपेयी लखनऊ से आये फूलचन्द्र आर्या आदि द्वारा आई हुई महिलाओं, किशोरियों आदि को काढ़ा दिया गया तथा बच्चों व महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण व वजन किया गया। शिविर में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आहार में आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलन न होने से परेशानिया बढ़ रही है पोषण तत्व की कमी ही बीमारियों का मुख्य कारण बना रहा है खान-पान में पोषण तत्वों की बढ़ोतरी करे। राष्ट्रीय पोषण माह उद्देश्य अच्छे पोषण व जानकारियों से स्वस्थ समाज के साथ ही सबका साथ-सबका विकास सबका विश्वास उद्देश्य है। कृत्य:नायाब टाइम्स


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Schi baat:*खरी बात * संस्कारी औरत का शरीर केवल उसका पति ही देख सकता है। लेकिन कुछ कुल्टा व चरित्रहीन औरतें अपने शरीर की नुमाइश दुनियां के सामने करती फिरती हैं। समझदार को इशारा ही काफी है। इस पर भी नारीवादी पुरुष और नारी दोनों, कहते हैं, कि यह पहनने वाले की मर्जी है कि वो क्या पहने। बिल्कुल सही, अगर आप सहमत हैं, तो अपने घर की औरतों को, ऐसे ही पहनावा पहनने की सलाह दें। हम तो चुप ही रहेंगे।
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