मण्डला आयुक्त की रायबरेली में बैठक: *एकीकृत कमान्ड एवं कंट्रोल केन्द्र को पूरी तरह से सक्रिय रखने के साथ ही एल-1 व एल-2 हास्पिटलों में समुचित व्यवस्थाए रहे दुरूस्त: मण्डलायुक्त कोविड सैपिंलिग व ट्रूनैट मशीन व रैपिड एंटीजेन से अधिक से अधिक किये जाये प्रतिदिन टेस्ट: मुकेश मेश्राम नगर पालिका नगर पंचायतों में व दूरदराज क्षेत्रों में साफ-सफाई युद्ध स्तर पर अभियान के रूप कराये: मण्डलायुक्त* रायबरेली,दिनाँक- 08 सितम्बर, 2020 को रायबरेली में लखनऊ मण्डल के मण्डलायुक्त लखनऊ मुकेश मेश्राम ने जनपद कलेक्ट्रेट स्थित एकीकृत कमान्ड एवं कंट्रोल केन्द्र व रेयान स्थित एल-1 हास्पिटल एवं बटोही एल-1 कोविड केयर सेन्टर का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मण्डलायुक्त ने रेयान स्कूल में बनाये गये एल-1 हास्पिटल में कोरोना संक्रमति मरीजों की बारे के कुशल क्षेम्य के बारे में पूछा एवं एल-2 अस्पताल व कोविड-19 के सम्बन्ध में जानकारी ली तथा कलेक्ट्रेट स्थित एकीकृत कमान्ड एवं कंट्रोल केन्द्र के निरीक्षण के दौरान उन्होंने कंट्रोल रूम अतिरिक्त मजिस्ट्रेट अंशिका दीक्षित व मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल एवं मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 संजय कुमार शर्मा की उपस्थित में निर्देश दिये कि एकीकृत कमान्ड एवं कंट्रोल केन्द की पूरी कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कंट्रोल रूम में प्रकाश कम होने पर एलईडी हाईपावर वाले लाये जाने के साथ ही ए0सी0 के स्थान पर पंखों को चालू रखने के निर्देश दिये। अगर गर्म अधिक होने पर ए0सी0 की अगर जरूरत पड़ती है तो खिड़की, दरवाजो को खुला रखा जाये जिससे कोविड-19 के वायरस का फैलाव को रोका जा सके। कोविड-19 कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम व बचाव हेतु जनपद में टेस्टिंग संख्या में लगातार वृद्धि किये जाने के निर्देश देते हुए कहा कि अधिक से अधिक टेस्ट कर कोविड-19 के संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। कंट्रोल रूम की सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से सक्रिय रखने के साथ ही दुरूस्त रखा जाये। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजो की रिकवरी दर को और बेहतर करे तथा बुजुर्गो, बच्चो, गर्भवती महिलाओं, बीमार तथा कमजोर व्यक्तियों की मेडिकल टेस्टिंग का कार्य युद्ध स्तर पर किया जाये। मण्डलायुक्त मुकेश मेश्राम ने बचत भवन के सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए निर्देश दिेय कि कोविड सैपिंलिग व ट्रूनैट मशीन व रैपिड एंटीजेन से टेस्ट प्रतिदिन किये जाये। एल-1 व एल-2 अस्पतालों में कोविड-19 के प्रोटोकाॅल के अनुरूप समस्त व्यवस्थाए सुनिश्चित की जाये। कोविड अस्पतालों में बेडों व आॅक्सीजन की सुचारू रूप से व्यवस्था के साथ-साथ 48 घण्टे का आॅक्सीजन बैंकअप रखा जाए। डोर-टू-डोर सर्वे, प्राईमरी व द्वितीय कांन्टैक्ट टेªसिंग संक्रमण की दृष्टि से संदिग्ध पाये गये लोगों का रैपिड एन्टीजन टेस्ट, एम्बुलेंस व्यवस्था, एल-1 एल-2 कोविड चिकित्सालय, होम आइसोलेशन आदि व्यवस्थाओं की समीक्षा निरन्तर की जाये। उन्होंने ईओं नगर पालिका, नगर पंचायत, एडीएम एफआर, डीपीआरओ को निर्देश दिये कि नगर पालिका व नगर पंचायतों सहित जनपद के शहरी व दूरदराज व ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई अभियान के रूप में कराई जाये साथ ही जहां पर पानी का भराव हो तो उसको दूर कराये तथा मच्छरों व जलजनित होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए एंटीलावा फागिंग आदि का छिड़काव नियमित रूप से कराया जाये। तथा जहां-जहां पर कंटेन्टमेन्ट जोर बनाये गये है वहां पर डोर-टू-डोर सर्वे करके टेस्टिंग कराई जाये तथा कोविड-19 मरीजो के सम्पर्क में आने वाले प्राईमरी व सेक्डरी लोगों की कोविड-19 सेपिंलिंग कराकर जांच कराई जाये। कोविड-19 पाये जाने पर मरीजों का तत्काल इलाज की व्यवस्था कराई जाये साथ ही उन्हें क्या-क्या करना है क्या नही करना है इसके बारे मे जानकारी देते हुए पम्पलेट उपलब्ध कराये जाये। होम आइसोलेशन के मरीजों से निरन्तर संवाद व मानवीय दृष्टिकोण बना रहने के साथ ही होम आइसोलेशन के मरीजों व अन्य जानकारियां प्रतिदिन मांगे जाने वाली जानकारी स्वास्थ्य विभाग, तहसील अधिकारी प्रतिदिन प्राप्त की जाये। जनसामान्य को बिना किसी आवश्यक कार्य हेतु घरों में रहने के लिए प्रेरित करने के साथ ही बिना मास्क के आवाजाही पर रोक लगाई जाये तथा सोशल डिस्टेसिंग व मास्क का प्रयोग एवं स्वास्थ्य प्रोटोकाॅल का कड़ाई से अनुपालन कराया जाये। मण्डलायुक्त ने जनपद की निगरानी कमेटिया सेक्टर मजिस्टेªट का भ्रमण, सीओं व एसडीएम का भ्रमण अपने-अपने क्षेत्रों में निरन्तर चलते रहना के निर्देश दिये गये है तथा लोगों को कोरोना के प्रति निरन्तर जागरूक भी किया जाता रहे। कोविड-19 तथा संचारी रोग नियंत्रण में स्वच्छता, सेनिटाइजेशन तथा फाॅगिंग कार्य निरन्तर कराया जाता रहे। मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल ने मण्डलायुक्त मुकेश मेश्राम को कोरोना वायरस की रोकथाम के सम्बन्ध में स्थापित कंट्रोल रूम में प्राप्त शिकायतों के सम्बन्ध में की गई कार्यवाही की दैनिक प्रगति रिपोर्ट के बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 संजय कुमार शर्मा व उनकी चिकित्सक टीम, अपर जिलाधिकारी प्रशासन राम अभिलाष, अपर जिलाधिकारी वि0रा0 प्रेम प्रकाश उपाध्याय, नगर मजिस्टेªट युगराज सिंह, एडी सूचना प्रमोद कुमार, मो0 राशिद, ईओं नगर पालिका आदि अधिकारी उपस्थित थे। मण्डलायुक्त ने एडीएम एफआर से अतिवृष्टि, बाढ़ प्रभावित यदि कोई क्षेत्र गोरोबाजार स्थित सीवर प्लाट आदि की भी जानकारी ली। कृत्य:नायाब टाइम्स


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Upsrtc.: *उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासनिक) 'वरिष्ठ पी.सी.एस' श्री विजय नारायण पाण्डेय 31 मई को होंगे रिटायर* लखनऊ। उ.प्र. परिवहन निगम के मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासनिक) विजय नारायण पांडेय (वरिष्ठ पी.सी.एस.) ने दिनाँक 20 दिसम्बर 2018 को इस पद का पदभार संभाला था और वो 5 महीना 11 दिन की सेवा करने के बाद 31 मई 2019 को विभाग को अच्छी अनुभवी जानकारियां देते हुए अपने पद से रिटायर हो जाएंगे। उनके परिवहन निगम के कार्य कलाप की सभी अधिकारियों ने सराहना की। श्री पांडेय का मत है कि अधिकारी को विभाग के हित में ही काम करना चाहिए। उन्होंने कहा हमारे बास श्री संजीव सरन वरिष्ठ आई.ए.एस., चेयरमैन, श्री धीरज शाहू वरिष्ठ,आई.ए.एस. ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, प्रबंध निदेशक राधे श्याम आई.ए.एस. अपर प्रबंध निदेशक से भी हमको कुछ नई जानकारियां मिली जो एक नसीहत ही है। परिवहन निगम के आशुतोष गौड़ स्टाफ ऑफिसर, पर्सनल असिस्टेंट प्रबंध निदेशक व अनवर अंजार (जनसंपर्क अधिकारी, परिवहन निगम) ने भी अपने अधिकारी श्री वी. एन. पाण्डेय की प्रशंसा करते हुए बताया कि पाण्डेय जी के साथ काम करना एक नायाब अनुभव के बराबर है। अब शायद ही ऐसा अधिकारी हमारे बीच आये। - नायाब अली
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Santa. ! ये मध्यप्रदेश में....खरगौन के पास ही ग्राम भट्टयान के "संत सियाराम" है ....जहाँ नर्मदा नदी भी है वर्तमान में जहाँ बाबा का निवास है वह क्षेत्र डूब में जाने वाला है ...सरकार ने इन्हें मुवावजे के 2 करोड़ 51 लाख दिए थे.... तो इन्होंने सारा पैसा खरगौन के समीप ही ग्राम नांगलवाड़ी में नाग देवता के मंदिर में दान कर दिया ताकि वहा भव्य मंदिर बने और सुविधा मिले।। बहुत ही पहुचे हुये सन्त है । आप लाखो रुपये दान में दो... पर नही लेते केवल 10 रुपये लेते है ...और रजिस्टर में देने वाले का नाम साथ ही नर्मदा परिक्रमा वालो का खाना और रहने की व्यवस्था ...कई सालों से अनवरत करते आ रहे है..! सारा दिन दर्शन करने वालो के लिए चाय बनाई जाती है। 100 वर्ष पूरे कर चुके है।। ऐसे ही सन्तों का सम्मान होना चाहिए.. ❤🙏🏻❤
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प०राम प्रसाद बिस्मिल जी हज़रो नमन: *“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” : कब और कैसे लिखा राम प्रसाद बिस्मिल ने यह गीत!* राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ का नाम कौन नहीं जानता। बिस्मिल, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दे दी। वे मैनपुरी षडयंत्र व काकोरी-कांड जैसी कई घटनाओं मे शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सदस्य भी थे। भारत की आजादी की नींव रखने वाले राम प्रसाद जितने वीर, स्वतंत्रता सेनानी थे उतने ही भावुक कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार व साहित्यकार भी थे। बिस्मिल उनका उर्दू उपनाम था जिसका हिन्दी में अर्थ होता है ‘गहरी चोट खाया हुआ व्यक्ति’। बिस्मिल के अलावा वे राम और अज्ञात के नाम से भी लेख व कवितायें लिखते थे। *राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ की तरह अशफ़ाक उल्ला खाँ भी बहुत अच्छे शायर थे। एक रोज का वाकया है अशफ़ाक, आर्य समाज मन्दिर शाहजहाँपुर में बिस्मिल के पास किसी काम से गये। संयोग से उस समय अशफ़ाक जिगर मुरादाबादी की यह गजल गुनगुना रहे थे* “कौन जाने ये तमन्ना इश्क की मंजिल में है। जो तमन्ना दिल से निकली फिर जो देखा दिल में है।।” बिस्मिल यह शेर सुनकर मुस्करा दिये तो अशफ़ाक ने पूछ ही लिया- “क्यों राम भाई! मैंने मिसरा कुछ गलत कह दिया क्या?” इस पर बिस्मिल ने जबाब दिया- “नहीं मेरे कृष्ण कन्हैया! यह बात नहीं। मैं जिगर साहब की बहुत इज्जत करता हूँ मगर उन्होंने मिर्ज़ा गालिब की पुरानी जमीन पर घिसा पिटा शेर कहकर कौन-सा बड़ा तीर मार लिया। कोई नयी रंगत देते तो मैं भी इरशाद कहता।” अशफ़ाक को बिस्मिल की यह बात जँची नहीं; उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा- “तो राम भाई! अब आप ही इसमें गिरह लगाइये, मैं मान जाऊँगा आपकी सोच जिगर और मिर्ज़ा गालिब से भी परले दर्जे की है।” *उसी वक्त पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने यह शेर कहा* “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-कातिल में है?” यह सुनते ही अशफ़ाक उछल पड़े और बिस्मिल को गले लगा के बोले- “राम भाई! मान गये; आप तो उस्तादों के भी उस्ताद हैं।” आगे जाकर बिस्मिल की यह गज़ल सभी क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की गाड़ी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढ़ाते हुए और अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए एक साथ गाया करते थे। बिस्मिल की शहादत के बाद उनका यह गीत क्रान्तिकारियों के लिए मंत्र बन गया था। न जाने कितने क्रांतिकारी इसे गाते हुए हँसते-हँसते फांसी पर चढ़ गए थे। पढ़िए राम प्रसाद बिस्मिल द्वारा लिखा गया देशभक्ति से ओतप्रोत यह गीत – सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ! हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है? एक से करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है। रहबरे-राहे-मुहब्बत! रह न जाना राह में, लज्जते-सेहरा-नवर्दी दूरि-ए-मंजिल में है। अब न अगले वल्वले हैं और न अरमानों की भीड़, एक मिट जाने की हसरत अब दिले-‘बिस्मिल’ में है । ए शहीद-ए-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफ़िल में है। खींच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद, आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? है लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर, और हम तैयार हैं सीना लिये अपना इधर। खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हाथ जिनमें हो जुनूँ , कटते नही तलवार से, सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से, और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है , सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हम तो निकले ही थे घर से बाँधकर सर पे कफ़न, जाँ हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम। जिन्दगी तो अपनी महमाँ मौत की महफ़िल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। यूँ खड़ा मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार, “क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?” सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब, होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज। दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है! सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। जिस्म वो क्या जिस्म है जिसमें न हो खूने-जुनूँ, क्या वो तूफाँ से लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है। पं० राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ उनके इस लोकप्रिय गीत के अलावा ग्यारह वर्ष के क्रान्तिकारी जीवन में बिस्मिल ने कई पुस्तकें भी लिखीं। जिनमें से ग्यारह पुस्तकें ही उनके जीवन काल में प्रकाशित हो सकीं। ब्रिटिश राज में उन सभी पुस्तकों को ज़ब्त कर लिया गया था। पर स्वतंत्र भारत में काफी खोज-बीन के पश्चात् उनकी लिखी हुई प्रामाणिक पुस्तकें इस समय पुस्तकालयों में उपलब्ध हैं। 16 दिसम्बर 1927 को बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा का आखिरी अध्याय (अन्तिम समय की बातें) पूर्ण करके जेल से बाहर भिजवा दिया। 18 दिसम्बर 1927 को माता-पिता से अन्तिम मुलाकात की और सोमवार 19 दिसम्बर 1927 को सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर गोरखपुर की जिला जेल में उन्हें फाँसी दे दी गयी। राम प्रसाद बिस्मिल और उनके जैसे लाखो क्रांतिकारियों के बलिदान का देश सद्येव ऋणी रहेगा! जय हिन्द !
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Schi baat:*खरी बात * संस्कारी औरत का शरीर केवल उसका पति ही देख सकता है। लेकिन कुछ कुल्टा व चरित्रहीन औरतें अपने शरीर की नुमाइश दुनियां के सामने करती फिरती हैं। समझदार को इशारा ही काफी है। इस पर भी नारीवादी पुरुष और नारी दोनों, कहते हैं, कि यह पहनने वाले की मर्जी है कि वो क्या पहने। बिल्कुल सही, अगर आप सहमत हैं, तो अपने घर की औरतों को, ऐसे ही पहनावा पहनने की सलाह दें। हम तो चुप ही रहेंगे।
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मुत्यु लोक का सच:*आचार्य रजनीश* (१) जब मेरी मृत्यु होगी तो आप मेरे रिश्तेदारों से मिलने आएंगे और मुझे पता भी नहीं चलेगा, तो अभी आ जाओ ना मुझ से मिलने। (२) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आप मेरे सारे गुनाह माफ कर देंगे, जिसका मुझे पता भी नहीं चलेगा, तो आज ही माफ कर दो ना। (३) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आप मेरी कद्र करेंगे और मेरे बारे में अच्छी बातें कहेंगे, जिसे मैं नहीं सुन सकूँगा, तो अभी कहे दो ना। (४) जब मेरी मृत्यु होगी, तो आपको लगेगा कि इस इन्सान के साथ और वक़्त बिताया होता तो अच्छा होता, तो आज ही आओ ना। इसीलिए कहता हूं कि इन्तजार मत करो, इन्तजार करने में कभी कभी बहुत देर हो जाती है। इस लिये मिलते रहो, माफ कर दो, या माफी माँग लो। *मन "ख्वाईशों" मे अटका रहा* *और* *जिन्दगी हमें "जी "कर चली गई.*
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