जिला मजिस्ट्रेट : *एनआईसी में वीसी के माध्यम से सीएम ने संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान को सम्बोधित करते हुए, डीएम अधिकारियों को निर्देश देते हुए-वीसी के माध्यम सीएम ने संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक के तृतीय चरण अभियान का किया शुभारम्भ कोरोना संक्रमण से बचाव व लड़ने के साथ ही संचारी रोगों से बचाव की कार्यवाही को आगे बढ़ाये: सीएम संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान तृतीय चरण 1 से 31 अक्टूबर तक सरकार इंसेफलाइटिस रोग के समूल उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध: डीएम* रायबरेली,आज दिनाँक,01 अक्टूबर, 2020 को जनपद में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने एनआईसी में संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान के तृतीय चरण शुभारम्भ सीएमओं सहित सम्बन्धित अधिकारियों को उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा अपने आवास पर संचारी रोग नियंत्रण के तृतीय चरण अभियान का शुभारम्भ के उपरान्त कोविड-19 के दृष्टिगत रखते हुए अभियान को मा0 मुख्यमंत्री जी के मंशा के अनुरूप संचालित करने के निर्देश दिये। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने समस्त जनपद को वीडियों काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्देश दिये कि आज से शुरू हुए 31 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान को सम्बन्धित सभी विभाग कोरोना संक्रमण से बचाव व लड़ने के साथ ही संचारी रोगों से बचाव की कार्यवाही को आगे बढ़ाये। पर्व त्योहार आदि पर भीड़-भाड़ न होंने दें साथ ही दो गज की दूरी मास्क है जरूरी मंत्र को अपनाते हुए संचारी रोगों के आयोजन व जागरूकता के कार्यक्रम को अन्तर विभागीय सहभागिता से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान जिन बच्चों के टीके नही लगे है उन्हें सावधानी व सुरक्षा के साथ ही लगाये जाये। इसके अलावा व्यापक पैमाने पर स्वच्छता, सेनेटाइजेशन आदि की सुविधाए बढ़ाई जाये। प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण व तृतीय विशेष संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान सरकार की शीर्ष प्राथमिकता वाले व जन-जन के स्वास्थ्य से जुड़ा एक कार्यक्रम है जिसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता व लापरवाही न बरती जाये। टीम भावना व कोविड-19 के संक्रमण से बचाव हेतु स्वास्थ्य प्रोटोकाल के अनुरूप कार्यवाही की जाये। उन्होंने कहा कि दिमागी बुखार को, मलेरिया, चिकनगुनिया, डेगू आदि बीमारियों को बेहतर संविलास व उपचार की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य की ओर बढ़े। वेक्टर एक्यूटइन्सेफलाइटिस सिंड्रोम या दिमागी बुखार एक गम्भीर बीमारी है जिसके कारण मृत्यु या अपगता भी हो सकती है। कोई भी बुखार दिमागी बुखार हो सकता है इस.लिए बुखार को नजरदाज नही करना चाहिए। पूर्व में जेई/एईएस आदि बीमारियों से बड़ी संख्या में बच्चों की मृत्यु हो जाती थी। परन्तु 2017 के बाद से स्वास्थ्य विभाग व अन्य विभागों के सामान्जस्य से चलाये गये संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान से मृत्यु व कई बीमारियों में काफी कमी आई है। जो स्वय में एक सफलता की कहानी है। जिलाधिकारी वीसी के दौरान सीएमओं तथा सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिये कि आज से 31 अक्टूबर तक चलने वाले संचारी रोग नियंत्रण के तृतीय चरण अभियान को सफलता पूर्व के साथ माईक्रोप्लान के अनुरूप लक्ष्य की पूर्ति की जाये तथा छुटे हुए बच्चों के टीकाकरण, जागरूकता कार्यक्रम जो भी किये जाए व कोविड-19 कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत रखते हुए तथा स्वास्थ्य प्रोटोकाल के नियमों का पालन एवं मास्क का प्रयोग करते हुए कार्यक्रम व कार्य किये जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जनपदों, जिसमे रायबरेली जनपद भी शामिल है। विशेष संचारी रोग नियंत्रण तथा विभिन्न जनपदों में दिमागी बुखार से लड़ने के लिए दस्तक अभियान शुरू किया जा रहा है। तृतीय विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान संचारी रोगों पर सरकार का सीधावार सुरक्षित होगा। जागरूकता को बढ़ाना चाहिए तथा अभियान को जन-जन से जोड़ने का आहवान किया जाए तथा बचाव बीमारियों में महत्वपूर्ण तरीका है जिसे जानना चाहिए। जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार व प्रशासन इंसेफलाइटिस रोग के समूल उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 वीरेन्द्र सिंह को निर्देश दिये गये कि चलाये जा रहे अभियान के बारे में आम जन को अवगत कराये तथा अमल में लाये जाने को कहे। जिलाधिकारी ने संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान की सफलता तथा मच्छरों के नाश के लिए फाॅगिंग मशीन से एक नाली व गढ्ढा में दवा भी छिड़की तथा आहवन किया कि अभियान की सफलता के लिए साफ-सफाई स्वच्छ जरूरी है इस पर ध्यान दें। संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान में कहा कि दिमागी बुखार को नियंत्रित करने से सबसे बड़ी समस्या इलाज में देरी है। दस्तक अभियान दिमागी बुखार से बचाव एवं नियंत्रण के लिए व्यवहार परिवर्तन संचार अभियान है इस में स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर 1-15 वर्ष के आयु के बच्चों के माता-पिता को बीमारी से बचाव एवं उपचार की जानकारी देगे। कोई भी बीमारी दिमागी बुखार हो सकता है। ऐसी स्थिति में इलाज में देरी न की जाये। स्वास्थ्य विभाग की अगुवाई में चलाए जा रहे संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान ग्राम समाज, पंचायती राज, नगरीय विकास शिक्षा, बाल विकास परियोजना, बीएसए, कृषि, पशुपालन, स्वास्थ्य, समाज कल्याण विभाग का सयुक्त प्रयास है वे भागीदारी कर रहे है। अभियान के अन्तर्गत प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर दस्तक देंगे और दिमागी बुखार से बचाव और उपचार के तरीके बताएगे। वह लोगों को बताएंगे कि बुखार आते ही मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाए, अपने घरों में और आस-पास सफाई रखें, जल भराव न होने दें, मच्छरों तथा चुहे-छछून्दरों से बचाव करें, स्वच्छ पेय जल का उपयोग करें और पशु-बाड़ों में सफाई रखें। या छोटे-छोटे उपाय बीमारियों के प्रकोप तथा इन से होने वाली क्षति को काफी हद तक कम कर सकते है। जिलाधिकारी ने इस अभियान के अन्तर्गत 1से 31 अक्टूबर तक के बीच जिला, ब्लाक और ग्राम पंचायत स्तर पर कई जन जागरूकता सोशल डिस्टेसिंग व मास्क के प्रयोग करके आयोजित किए जाए। सभी विकास खण्ड, तहसील व अन्य महत्वपूर्ण स्थानों में सूचना एवं जनसम्पर्क उ0प्र0 लखनऊ द्वारा होर्डिग्स के माध्यम से कोविड-19 के संक्रमण से बचाव, दो गज दूरी मास्क है जरूरी आदि द्वारा भी जागरूक किया जा है। मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा कोविड-19 वायरस के बचाव के साथ-साथ संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान के पम्पलेट आदि सभी विकास खण्डों, तहसीलों आदि महत्वपूर्ण स्थान जहां पर आम पब्लिक को उपलब्ध कराया जाये। अभियान के दौरान जानकारी के साथ दिमागी बुखार पर चैतरफावार भी होगा, जिसमें नियमित टीकाकरण के अन्तर्गत जेई टीकाकारण, मच्छरों से बचाव के लिए फाॅगिंग, बुखार ग्रस्त कटाई, नालियों की सफाई, हैण्डपम्पों की मरम्मत और शौचालय निर्माण आदि शामिल है। संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान में सभी को पूरी तरह सहयोग करना होगा। प्रत्येक बच्चा अनमोल है और सही जानकारी एवं सही समय पर दिया गया इलाज उनकी जान बचा सकता है। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल, एडीएम वि0रा0 प्रेम प्रकाश उपाध्याय, बेसिक शिक्षा अधिकारी आनन्द कुमार शर्मा, एडी सूचना प्रमोद कुमार, ए0सी0एम0ओं डा0 खालिद रिजवान, डी0एस0 अस्थाना, डीपीआरओ, सीडीपीओ आदि अधिकारी उपस्थित थे। कृत्य:नायाब टाइम्स


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Schi baat:*खरी बात * संस्कारी औरत का शरीर केवल उसका पति ही देख सकता है। लेकिन कुछ कुल्टा व चरित्रहीन औरतें अपने शरीर की नुमाइश दुनियां के सामने करती फिरती हैं। समझदार को इशारा ही काफी है। इस पर भी नारीवादी पुरुष और नारी दोनों, कहते हैं, कि यह पहनने वाले की मर्जी है कि वो क्या पहने। बिल्कुल सही, अगर आप सहमत हैं, तो अपने घर की औरतों को, ऐसे ही पहनावा पहनने की सलाह दें। हम तो चुप ही रहेंगे।
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रायबरेली हो कर प्रयागराज ? :*20 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक राजमार्ग 24बी पर यातायात हेतु रूट परिवर्तित:वैभव श्रीवास्तव "डीएम"* रायबरेली:"सू०वि०रा०" ने जानकारी दी है कि *भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा जनपद रायबरेली* में रायबरेली प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग 24बी के किमी 84 में स्थित सई सेतु में मेसर्स सनराइज इन्जीनियर द्वारा प्रारम्भ किये गये मरम्मत कार्य एवं म्गचंदेपवद श्रवपदज के फिक्सिंग के लिए 20 अक्टूबर से 5 नवम्बर 2020 तक पूर्ण यातायात परिवर्तित कराने तथा ब्रिज वर्ष 1966 में खुलने के पश्चात कोई मरम्मत का कार्य न किये जाने कारण ब्रिज का म्गचंदेपवद श्रवपदज पूर्ण रूप से निष्किय हो चुका है, जिसके वजह से पुल पर प्रतिकूल दबाव पड रहा है तथा क्षतिग्रस्त होने की स्थिति बन रही है, जिसके कारण म्गचंदेपवद श्रवपदज तत्काल बदलना अति आवश्यक है। जिसके तहत यातायात परिवर्तित किया जायेगा। हल्ले वाहन के लिए लखनऊ के तरफ से प्रयागराज की तरफ जाने वाले हल्के वाहन रायबरेली सिविल लाइन चैराहे से बांयी तरफ2-25.0 किमी0 जाकर रिंग रोड से होकर जौनपुर रोड पर निकल कर मुंशीगंज बाईपास से प्रयागराज की तरफ जायेगें। प्रयागराज की तरफ से लखनऊ की तरफ जाने वाले हल्ले वाहन भी इसी रास्ते से जायेगें। भारी वाहन के लिए लखनऊ से प्रयागराज की तरफ जाने के लिए बछरावां से लालगंज होकर ऊंचाहार से प्रयागराज की तरफ से जायेगें। रायबरेली से प्रयागराज की तरफ जाने वाले वाहन रायबरेली से परशदेपुर होकर सलोन से ऊंचाहार होकर प्रयागराज की तरफ जायेगें। प्रयागराज से लखनऊ या कानपुर या रायबरेली की तरफ जाने वाले वाहन लखनऊ से प्रयागराज की तरफ जाने के लिए बछरावां से लालगंज होकर ऊंचाहार से प्रयागराज की तरफ से जायेगें। रायबरेली से प्रयागराज की तरफ जाने वाले वाहन रायबरेली से परशदेपुर होकर सलोन से ऊंचाहार होकर प्रयागराज की तरफ जायेगें। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए सभी सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये है कि सुरक्षा कारणों को दृष्टिगत रखते हुए उक्त मार्गो पर 20 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक पूर्ण यातायात परिवर्तित होने पर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करेगें। यह जानकारी अपर जिलाधिकारी राम अभिलाष द्वारा दी गई है। कृत्य:नायाब टाइम्स
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डग्गामार बसे: *डग्गामार बसें बेलगाम, रोडवेज को लगा रहीं रोजाना लाखों रुपये का चूना,पुलिस कर्मी बने मूक दर्शक* *लखनऊ* उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित स्थान चारबाग़ बस स्टेशन से, महज कुछ दूर पर चारबाग़ रेलवे स्टेशन के सामने, डग्गेमार बसें सुबह होते ही चारबाग़ मेट्रो स्टेशन के नीचे मुख्य मार्ग पर ही खड़ी हो जाती है,जिससे यातायात ही नही प्रभावित होता बल्कि रोडवेज की आमदनी में भी कमी आती है। पिछले कई महीनों से परिवहन निगम व परिवहन विभाग के अधिकारी द्वारा लगातार डग्गामार वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया गया परंतु डग्गामार पर प्रतिबंध लगाने में प्रशासन पूर्ण रूप से असफल रहा है। चारबाग़ रेलवे स्टेशन के सामने से बहराइच, गोरखपुर, आजमगढ के लिए साधारण और वातानुकूलित डग्गामार बसें लगती है। गुप्त सूत्रों से पता चला है कि डग्गामार वाहनों के वाहन स्वामी और पुलिस प्रशासन की सांठ गांठ से डग्गामार वाहनों का धंधा फल फूल रहा है। *कृत्य:नायाब टाइम्स*
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वीरप्पन का बोल बाला तमिलनाडु में रहा: "कुमार वैभव" तमिलनाडु,वीरप्पन पर 2000 हाथियों और 184 लोगो को मारने का आरोप था। उसने चंदन की कितनी तस्करी की इसका तो अंदाज़ा ही नहीं है। जब 2004 में वीरप्पन का इनकाउंटर हुआ उन दिनों मैं तमिलनाडु के मदुराई शहर में था। यह तमिलनाडु का दूसरा सबसे बड़ा नगर है और अपने 'मीनाक्षी मंदिर' के लिए दुनिया में मशहूर है। वीरप्पन का इनकाउंटर के विजय कुमार नाम के IPS अधिकारी ने किया था जो इस समय जम्मू एंड कश्मीर में गवर्नर के एडवाईजर हैं। उन्होंने वीरप्पन पर एक किताब भी लिखी है। वीरप्पन के मशहूर होने से पहले तमिलनाडु में एक जंगल पैट्रोल पुलिस हुआ करती थी, जिसके प्रमुख होते थे लहीम शहीम गोपालकृष्णन। उनकी बांहों के डोले इतने मज़बूत होते थे कि उनके साथी उन्हें रैम्बो कह कर पुकारते थे। रैम्बो गोपालकृष्णन की ख़ास बात ये थी कि वो वीरप्पन की ही वन्नियार जाति से आते थे। 9 अप्रैल, 1993 की सुबह कोलाथपुर गाँव में एक बड़ा बैनर पाया गया जिसमें रैम्बो के लिए वीरप्पन की तरफ़ से भद्दी भद्दी गालियाँ लिखी हुई थी। उसमें उनको ये चुनौती भी दी गई थी कि अगर दम है तो वो आकर वीरप्पन को पकड़ें। रैम्बो ने तय किया कि वो उसी समय वीरप्पन को पकड़ने निकलेंगे। जैसे ही वो पलार पुल पर पहुंचे, उनकी जीप ख़राब हो गई। उन्होंने उसे छोड़ा और पुल पर तैनात पुलिस से दो बसें ले ली। पहली बस में रैम्बो 15 मुख़बिरों, 4 पुलिसवालों और 2 वन गार्ड के साथ सवार हुए। पीछे आ रही दूसरी बस में अपने छह साथियों के साथ तमिलनाडु पुलिस के इंस्पेक्टर अशोक कुमार चल रहे थे। वीरप्पन के गैंग ने तेज़ी से आती बसों की आवाज़ सुनी। वो परेशान हुए क्योंकि उन्हें लग रहा था कि रैम्बो जीप पर सवार होंगे। लेकिन वीरप्पन ने दूर से से ही देख कर सीटी बजाई। उन्होंने दूर से रैम्बो को आगे आ रही बस की पहली सीट पर बैठे देख लिया था। जैसे ही बस एक निर्धारित स्थान पर पहुंची वीरप्पन के गैंग के सदस्य साइमन ने बारूदी सुरंगों से जुड़ी हुई 12 बोल्ट कार बैटरी के तार जोड़ दिए। एक ज़बरदस्त धमाका हुआ। 3000 डिग्री सेल्सियस का तापमान पैदा हुआ। बसों के नीचे की धरती दहली और पूरी की पूरी बस हवा में उछल गई और पत्थरों, धातु और कटे फटे मांस के लोथड़ों का मलबा 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से ज़मीन पर आ गिरा। के विजय कुमार अपनी किताब वीरप्पन 'चेज़िंग द ब्रिगांड' में लिखते हैं, "दृश्य इतना भयानक था कि दूर चट्टान की आड़ में बैठा वीरप्पन भी कांपने लगा और उसका पूरा शरीर पसीने से सराबोर हो गया। थोड़ी देर बार जब इंस्पेक्टर अशोक कुमार वहाँ पहुंचे तो उन्होंने 21 क्षतविक्षत शवों को गिना।" अशोक कुमार ने विजय कुमार को बताया कि उन्होने सारे शवों और घायलों को पीछे आ रही दूसरी बस में रखा लेकिन इस बदहवासी में हम अपने एक साथी सुगुमार को वहीं छोड़ आए क्योंकि वो हवा में उड़ कर कुछ दूरी पर जा गिरा था। उसका पता तब चला जब बस वहाँ से जा चुकी थी। कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया। ये वीरप्पन का पहला बड़ा हिट था जिसने उसे पूरे भारत में कुख्यात कर दिया। 18 जनवरी 1952 को जन्मे वीरप्पन के बारे में कहा जाता है कि उसने 17 साल की उम्र में पहली बार हाथी का शिकार किया था। हाथी को मारने की उसकी फ़ेवरेट तकनीक होती थी, उसके माथे के बींचोंबीच गोली मारना। के विजय कुमार बताते हैं, "एक बार वन अधिकारी श्रीनिवास ने वीरप्पन को गिरफ़्तार भी किया था। लेकिन उसने सुरक्षाकर्मियों से कहा उसके सिर में तेज़ दर्द है, इसलिए उसे तेल दिया जाए जिसे वो अपने सिर में लगा सके। उसने वो तेल सिर में लगाने की बताए अपने हाथों में लगाया। कुछ ही मिनटों में उसकी कलाइयाँ हथकड़ी से बाहर आ गईं।हालांकि वीरप्पन कई दिनों तक पुलिस की हिरासत में था लेकिन उसकी उंगलियों के निशान नहीं लिए गए।" वीरप्पन की ख़ूंख़ारियत का ये आलम था कि एक बार उसने भारतीय वन सेवा के एक अधिकारी पी श्रीनिवास का सिर काट कर उससे अपने साथियों के साथ फ़ुटबाल खेली थी। ये वही श्रीनिवास थे जिन्होंने वीरप्पन के पहली बार गिरफ़्तार किया था। विजय कुमार बताते हैं, "श्रीनिवास वीरप्पन के छोटे भाई अरजुनन से लगातार संपर्क में थे। एक दिन उसने श्रीनिवास से कहा कि वीरप्पन हथियार डालने के लिए तैयार है। उसने कहा कि आप नामदेल्ही की तरफ़ चलना शुरू करिए। वो आपसे आधे रास्ते पर मिलेगा। श्रीनिवास कुछ लोगों के साथ वीरप्पन से मिलने के लिए रवाना हुए। इस दौरान श्रीनिवास ने महसूस ही नहीं किया कि धीरे धीरे एक एक कर सभी लोग उसका साथ छोड़ते चले गए।" "एक समय ऐसा आया जब वीरप्पन का भाई अरजुनन ही उनके साथ रह गया। जब वो एक तालाब के पास पहुंचे तो एक झाड़ी से कुछ लोगों की उठती हुई परछाई दिखाई दी। उनमें से एक लंबे शख्स की लंबी लंबी मूछें थी। श्रीनिवासन पहले ये समझे कि वीरप्पन हथियार डालने वाले हैं। तभी उन्हें लगा कि कुछ गड़बड़ है।" "वीरप्पन के हाथ में ऱाइफ़ल थी और वो उनको घूर कर देख रहा था श्रीनिवास ने पीछे मुड़ कर देखा तो पाया कि वो अरजुनन के साथ बिल्कुल अकेले खड़े थे। वीरप्पन उन्हें देख कर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा। इससे पहले कि श्रीनिवासन कुछ कहते, वीरप्पन ने फ़ायर किया। लेकिन वीरप्पन इतने पर ही नहीं रुका। उसने श्रीनिवास का सिर काटा और उसे एक ट्राफ़ी की तरह अपने घर ले गया। वहाँ पर उसने और उसके गैंग ने इनके सिर को फ़ुटबाल की तरह खेला।" अपराध जगत में क्रूरता के आपने कई उदाहरण सुने होंगे लेकिन ये नहीं सुना होगा कि किसी लुटेरे या डाकू ने अपने आप को बचाने के लिए अपनी नवजात बेटी की बलि चढ़ा दी हो। विजय कुमार बताते हैं, "1993 में वीरप्पन की एक लड़की पैदा हुई थी। तब तक उसके गैंग के सदस्यों की संख्या 100 के पार पहुंच चुकी थी एक बच्चे के रोने की आवाज़ 110 डेसिबल के आसपास होती है जो बिजली कड़कने की आवाज़ से सिर्फ़ 10 डेसिबल कम होती है। जंगल में बच्चे के रोने की आवाज़ रात के अंधेरे में ढाई किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है।" "एक बार वीरप्पन उसके रोने की वजह से मुसीबत में फ़ंस चुका था। इसलिए उसने अपनी बच्ची की आवाज़ को हमेशा के लिए बंद करने का फ़ैसला किया। 1993 में कर्नाटक एसटीएफ़ को मारी माडुवू में एक समतल ज़मीन पर उठी ही जगह दिखाई दी थी। जब उसे खोद कर देखा गया तो उसके नीचे से एक नवजात बच्ची का शव मिला।" सन 2000 में वीरप्पन ने दक्षिण भारत के मशहूर अभिनेता राज कुमार का अपहरण कर लिया। राजकुमार की हैसियत कन्नड़ फिल्मों में वही थी जो रजनीकांत की तमिल में है।राजकुमार 100 से अधिक दिनों तक वीरप्पन के चंगुल में रहे। इस दौरान उसने कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्य सरकारों को घुटनों पर ला दिया। जून, 2001 में दिन के 11 बजे अचानक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के विजय कुमार के फ़ोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर फ़्लैश हुआ, 'अम्मा।' उन्होंने जयललिता के फ़ोन नंबर को अम्मा के नाम से फ़ीड कर रखा था। जयललिता बिना कोई समय गंवाते हुए मुद्दे पर आईं और बोली, "हम आपको तमिलनाडु स्पेशल टास्क फ़ोर्स का प्रमुख बना रहे हैं। इस चंदन तस्कर की समस्या कुछ ज़्यादा ही सिर उठा रही है। आपको आपके आदेश कल तक मिल जाएंगें।" एसटीएफ़ का प्रमुख बनते ही विजय कुमार ने वीरप्पन के बारे में ख़ुफ़िया जानकारी जमा करनी शुरू कर दी। पता चला कि वीरप्पन की आँख में तकलीफ़ है। अपनी मूछों में ख़िजाब लगाते समय उसकी कुछ बूंदें छिटक कर वीरप्पन की आँख में जा गिरी थी। विजय कुमार बताते हैं, "वीरप्पन को बाहरी दुनिया को ऑडियो और वीडियो टेप्स भेजने का शौक था। एक बार ऐसे ही एक वीडियो में हमने देखा कि वीरप्पन को एक कागज़ पढ़ने में दिक्कत हो रही है। तभी हमें ये पहली बार संकेत मिला कि उसकी आँखों में कुछ गड़बड़ है। फिर हमने फ़ैसला किया कि हम अपने दल को छोटा करेंगे। जब भी हम बड़ी टीम के लिए राशन ख़रीदते थे, लोगों की नज़र में आ जाते थे और वीरप्पन को इसकी भनक पहले से ही मिल जाती थी। इसलिए हमने छह छह लोगों की कई टीमें बनाईं।" वीरप्पन के लिए जाल बिछाया गया कि उसको अपनी आँखों का इलाज कराने के लिए जंगल से बाहर आने के लिए मज़बूर किया जाए। उसके लिए एक ख़ास एंबुलेंस का इंतज़ाम किया गया जिस पर लिखा था एसकेएस हास्पिटल सेलम। उस एंबुलेंस में एसटीएफ़ के दो लोग इंस्पेक्टर वैल्लईदुरई और ड्राइवर सरवनन पहले से ही बैठे हुए थे। वीरप्पन ने सफ़ेद कपड़े पहन रखे थे और पहचाने जाने से बचने के लिए उसने अपनी मशहूर हैंडलबार मूछों को कुतर दिया था। यह 18 अक्टूबर 2004 की रात्रि थी। पूर्व निर्धारित स्थान पर ड्राइवर सरवनन ने इतनी ज़ोर से ब्रेक लगाया कि एंबुलेंस में बैठे सभी लोग अपनी जगह पर गिर गए। के विजय कुमार याद करते हैं, "वो बहुत स्पीड से आ रहे थे। सरवनन ने इतनी तेज़ ब्रेक लगाया कि टायर से हमें धुंआ उठता दिखाई दिया। टायर के जलने की महक हमारी नाक तक पहुंच रही थी। सरवनन दौड़ कर मेरे पास पहुंचा।" "मैंने उसके मुंह से साफ़ साफ़ सुना, वीरप्पन एंबुलेंस के अंदर है। तभी मेरे असिस्टेंट की आवाज़ मेगा फ़ोन पर गूंजी,' हथियार डाल दो। तुम चारों तरफ़ से घिर चुके हो। पहला फ़ायर उनकी तरफ़ से आया। फिर हमारे चारों तरफ़ से गोलियाँ चलने लगी। मैंने भी अपनी ऐके 47 का पूरा बर्स्ट एंबुलेंस में झोंक दिया। छोड़ी देर बाद एंबुलेंस से जवाबी फ़ायर आने बंद हो गए।" "हमने उनपर कुल 338 राउंड गोलियाँ चलाईं। एकदम से सब कुछ धुआं सा हो गया। एक जोर की आवाज़ आई, 'आल क्लीयर।' एनकाउंटर 10 बज कर पचास मिनट पर शुरू हुआ था। 20 मिनटों के अंदर वीरप्पन और उसके तीनों साथी मारे जा चुके थे।" आश्चर्य की बात थी कि वीरप्पन को सिर्फ़ दो 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ख़्याल है मुझे जो कुछ कहना है उसे सुन कर वो बहुत ख़ुश होंगी। अगले ही क्षण जयललिता की आवाज़ फ़ोन पर सुनी। मेरे मुंह से निकला, मैम वी हैव गॉट हिम।जयललिता ने मुझे और मेरी टीम को बधाई दी और कहा मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे इससे अच्छी ख़बर नहीं मिली।" फ़ोन काटने के बाद विजय कुमार अपनी जीप की तरफ़ बढ़े। उन्होंने एंबुलेंस पर अंतिम नज़र डाली। उसकी छत पर लगी नीली बत्ती अभी भी घूम रही थी। दिलचस्प बात ये थी कि उस पर एक भी गोली नहीं लगी थी। उन्होंने इसे स्विच ऑफ़ करने का आदेश दिया। बुझी हुई बत्ती मानो पूरी दुनिया को बता रही थी, 'मिशन पूरा हुआ।" कृत्य:नायाब टाइम्स
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यौमे पैदाइश की मुबारकबाद आरिज़: *"यौमे पैदाइश"1,अक्टूबर 2020 के मौके पर आरिज़ अली को तहेदिल से मुबारकबाद* रायबरेली,आज हमारे पौत्र आरिज़ अली पुत्र नौशाद अली के योमे पैदाइश का दिन 1अक्टूबर 2020 है । जिसकी खुशी में उसे तहेदिल से *मुबारकबाद* "हैप्पी बर्थडे" आरिज़ अली । दोस्तो आप सब गुजरीस है के आप उसको अपनी दुवाओ से भी नवाज़े। *हैप्पी बर्थडे* आरिज़ अली....!🎂💐 नायाब अली लखनवी सम्पादक "नायाब टाइम्स" *अस्लामु अलैकुम/शुभप्रभात* हैप्पी गुरुवार
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