पोषण पर बैठक जिला मजिस्ट्रेट: *डीएम को जिला पोषण समिति की बैठक में सम्पन्न हुए पोषण माह के कार्यो की दी गई जानकारीयाँ। कुपोषित परिवारो को अच्छा पोषण उपलब्ध कराने के लिए अधिक से अधिक किचन गार्डेन किये जाए विकसित: वैभव श्रीवास्तव* रायबरेली,आज दिनाँक,01 अक्टूबर, 2020 को जनपद में भारत सरकार व प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार जनपद में विगत माह 30 सितम्बर तक राष्ट्रीय पोषण मिशन के अन्तर्गत राष्ट्रीय पोषण माह पोषण शपथ के साथ सम्पन्न हुआ। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तम पोषण, उत्तर प्रदेश रोशन को पोषण की जागरूकता व स्वस्थ राष्ट की कुंजी को जन सहयोग आंदोलन के माध्यम से अधिक सशक्त किया जा सकता हैं। कुपोषण तीन प्रकार के होते है जिसमें सामान्य वेस्टेड (सैम/मैम), स्टेन्टेड (नाटापन) व अदृष्य (भ्पककमद ीनदहमत) सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, एनीमिया विटामिन ए व जिंक होते हैं। कुपोषण से मुक्ति के लिए 0-5 वर्ष के बच्चों के साथ ही महिलाए, किशोरियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा जरूरी है। इसके लिए सुपोषित जनपद, प्रदेश के लिए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता जरूरी है। बचत भवन में जिला पोषण समिति की आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिये कि पोषण वाटिका/किचन गार्डेन का निर्माण व वृक्षारोपण आदि कार्य ग्राम्य विकास, पंचायती राज व महिला एवं बाल विकास, उद्यान विभाग, कृषि विभाग, बीएसए आदि से समेकित प्रयासों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण किये जाए। ऐसे वृक्षों का रोपण किया जाए जिससे पोषक तत्व व विटामिन अधिक हो। पोषण देने वाले पौधो व वृक्षों का रोपण किया जाए। गम्भवती महिलाए किशोरियों व बच्चों में पोषण तत्वों की कमी न हो इसके लिए शरीर में इम्यूनिटी भी जरूरी है काढ़ा आदि भी अवश्य दिया जाए। सेजन की पत्तियां व फल से रक्त की कमी को दूर किया जा सकता है। रक्त की कमी से क्या-क्या बीमारियां महिलाओं व किशोरियों में उत्पन्न होती है। इसमें क्या खाना चाहिए आदि सहित स्वास्थ्य व साफ-सफाई के बारे में विस्तृत जानकारियां दी जाए। आगनबाड़ी केन्द्रों द्वारा शरीर की ताकत व क्षमता विकसित करने के लिए विभिन्न प्रकार की रेसीपी बताए जाए तथा उसके खान-पान से क्या फायदे है आंगनबाड़ी कार्यकत्री व आशाओं द्वारा बताया जाए। उन्होंने कहा कि कायाकल्प योजनान्तर्गत कराये जा रहे कार्यो की जानकारी प्राप्त करते हुए निर्देश दिये कि कायाकल्प के दौरान जो भी कार्य किये जाये व गुणवत्ता व मानक के अनुरूप कराये करें। जिलाधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन का उद्देश्य बच्चों महिलाओं किशोरिया जो कुपोषित है उनके स्वास्थ से जुड़ा राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसे आगे भी चलाया जाए व किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाये। उन्होने सभी एसडीएमए बीडीओ तथा मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देश दिये कि मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना जिसमें पूर्व में ही व्यवस्था है जिसका अनुपालन करते हुये कार्यवाही की जाये। उन्होने कहा कि कुपोषित ऐसे परिवारो को अच्छा पोषण उपलब्ध कराने के लिए किचन गार्डेन विकसित करने के लिए प्रेरित व प्रोत्साहित किया जाये। उन्होंने आगनबाड़ी कार्यकत्री व आशाओं आदि को निर्देश दिये कि कोविड-19 कोरोना संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए घर-घर कोरोना सम्बन्धित मरीजों व जिनमें बुखार, जुखाम, सांस फुलने वाले मरीजों की जानकारी दें जिससें मरीजों को समय से इलाज किया जा सके और मृत्यु दर में कमी लाए जा सके। उन्होंने रक्त की कमी महिलाए, कुपोषित बच्चो व किशोरियांे आदि की भी जानकारी पोषण से सम्बन्धित रखने के निर्देश दिये तथा कुपोषित बच्चों को पोषित बनाने की कार्यवाही की जाए। जिला कार्यक्रम अधिकारी शरद कुमार त्रिपाठी ने सम्पन्न हुए राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान जनपद में कराये गये पोषण सम्बन्धित कार्यक्रमों की जानकारी दी। जिला स्तर पर कार्यक्रम के शुभारम्भ के साथ ही सभी विकास खण्डों व दूरदराज क्षेत्रों में पोषण माह का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय पोषण माह/पोषण मिशन अभियान का मुख्य उद्देश्य कुपोषण में कमी लाना है। खुले में शौच, दस्त, साफ पानी की कमी, अपर्याप्त भोजन, स्तनपान एवं उपरी आहार से बच्चे को वंचित रखना आदि कुपोषण के कारण रहे हैं। गर्भावस्था के दौरान एवं बच्चे के जन्म के बाद से 730 दिन (कुल 1000 दिन) तक बच्चे की सही देखभाल, मां को पोषक आहार देकर, आइरन का सेवन प्रसव पूर्ण जांचे कराकर, नियमित टीकाकरण से बच्चों को कुपोषित होने से बचाया जा सकता है इसी जानकारी दी गई। नवजात शिशुओं को बचाने के लिए बच्चा पैदा होने लगभग कुछ घण्टे के बाद उसको मा का दूध पिलाना अत्यधिक जरूरी है इस पर सभी सीडीपीओ अधिकारी/कर्मचारी मुख्य सेविकाए, आगनबाड़ी कार्यकत्री आदि ने भी अभियान के दौरान जानकारी दी। कुपोषण को कम करने के लिए घर-घर व स्कूल कालेजों में जहां पर स्थान चिन्हित कर किंचन गार्डेन तैयार कर फल, सब्जी आदि पैदा करके पोषक तत्व युक्त आहार खाए सदैव अच्छी सेहत पाए की भी जानकारी दी गई। बच्चों का वजन, साफ-सफाई, पोषित आहार, गोवश से फायदे आदि संचारी रोगों पर नियंत्रण, शुद्ध पेयजल, पराली जलाने से किसानों को नुकसान आदि के भी बारे में बताया गया। उन्होंने कहा कि जिला सूचना विभाग द्वारा आये हुए आमजनमानस व आंगनबाड़ी कार्यकत्री को कोरोना जागरूकता से सम्बन्धि कोरोना से बचना है असान बातो का रखे ध्यान व 6 विधानसभाओं की सुशासन के 3 वर्ष विकास पुस्तिका को भी आमजनमानस में मुहैया कराई गई। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल ने सम्बन्धित अधिकारियों व सीडीपीओं आदि को उचित दिशा निर्देश दिये। कृत्य:नायाब टाइम्स


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*--1918 में पहली बार इस्तेमाल हुआ ''हिन्दू'' शब्द !--* *तुलसीदास(1511ई०-1623ई०)(सम्वत 1568वि०-1680वि०)ने रामचरित मानस मुगलकाल में लिखी,पर मुगलों की बुराई में एक भी चौपाई नहीं लिखी क्यों ?* *क्या उस समय हिन्दू मुसलमान का मामला नहीं था ?* *हाँ,उस समय हिंदू मुसलमान का मामला नहीं था क्योंकि उस समय हिन्दू नाम का कोई धर्म ही नहीं था।* *तो फिर उस समय कौनसा धर्म था ?* *उस समय ब्राह्मण धर्म था और ब्राह्मण मुगलों के साथ मिलजुल कर रहते थे,यहाँ तक कि आपस में रिश्तेदार बनकर भारत पर राज कर रहे थे,उस समय वर्ण व्यवस्था थी।तब कोई हिन्दू के नाम से नहीं जाति के नाम से पहचाना जाता था।वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य से नीचे शूद्र था सभी अधिकार से वंचित,जिसका कार्य सिर्फ सेवा करना था,मतलब सीधे शब्दों में गुलाम था।* *तो फिर हिन्दू नाम का धर्म कब से आया ?* *ब्राह्मण धर्म का नया नाम हिन्दू तब आया जब वयस्क मताधिकार का मामला आया,जब इंग्लैंड में वयस्क मताधिकार का कानून लागू हुआ और इसको भारत में भी लागू करने की बात हुई।* *इसी पर ब्राह्मण तिलक बोला था,"क्या ये तेली, तम्बोली,कुणभठ संसद में जाकर हल चलायेंगे,तेल बेचेंगे ? इसलिए स्वराज इनका नहीं मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है यानि ब्राह्मणों का। हिन्दू शब्द का प्रयोग पहली बार 1918 में इस्तेमाल किया गया।* *तो ब्राह्मण धर्म खतरे में क्यों पड़ा ?* *क्योंकि भारत में उस समय अँग्रेजों का राज था,वहाँ वयस्क मताधिकार लागू हुआ तो फिर भारत में तो होना ही था।* *ब्राह्मण की संख्या 3.5% हैं,अल्पसंख्यक हैं तो राज कैसे करेंगे ?* *ब्राह्मण धर्म के सारे ग्रंथ शूद्रों के विरोध में,मतलब हक-अधिकार छीनने के लिए,शूद्रों की मानसिकता बदलने के लिए षड़यंत्र का रूप दिया गया।* *आज का OBC ही ब्राह्मण धर्म का शूद्र है। SC (अनुसूचित जाति) के लोगों को तो अछूत घोषित करके वर्ण व्यवस्था से बाहर रखा गया था।* *ST (अनुसूचित जनजाति) के लोग तो जंगलों में थे उनसे ब्राह्मण धर्म को क्या खतरा ? ST को तो विदेशी आर्यों ने सिंधु घाटी सभ्यता संघर्ष के समय से ही जंगलों में जाकर रहने पर मजबूर किया उनको वनवासी कह दिया।* *ब्राह्मणों ने षड़यंत्र से हिन्दू शब्द का इस्तेमाल किया जिससे सबको को समानता का अहसास हो लेकिन ब्राह्मणों ने समाज में व्यवस्था ब्राह्मण धर्म की ही रखी।जिसमें जातियाँ हैं,ये जातियाँ ही ब्राह्मण धर्म का प्राण तत्व हैं, इनके बिना ब्राह्मण का वर्चस्व खत्म हो जायेगा।* *इसलिए तुलसीदास ने मुसलमानों के विरोध में नहीं शूद्रों के विरोध में शूद्रों को गुलाम बनाए रखने के लिए लिखा !* *"ढोल गंवार शूद्र पशु नारी।ये सब ताड़न के अधिकारी।।"* *अब जब मुगल चले गये,देश में OBC-SC के लोग ब्राह्मण धर्म के विरोध में ब्राह्मण धर्म के अन्याय अत्याचार से दुखी होकर इस्लाम अपना लिया था* *तो अब ब्राह्मण अगर मुसलमानों के विरोध में जाकर षड्यंत्र नहीं करेगा तो OBC,ST,SC के लोगों को प्रतिक्रिया से हिन्दू बनाकर,बहुसंख्यक लोगों का हिन्दू के नाम पर ध्रुवीकरण करके अल्पसंख्यक ब्राह्मण बहुसंख्यक बनकर राज कैसे करेगा ?* *52% OBC का भारत पर शासन होना चाहिये था क्योंकि OBC यहाँ पर अधिक तादात में है लेकिन यहीं वर्ग ब्राह्मण का सबसे बड़ा गुलाम भी है। यहीं इस धर्म का सुरक्षाबल बना हुआ है,यदि गलती से भी किसी ने ब्राह्मणवाद के खिलाफ आवाज़ उठाई तो यहीं OBC ब्राह्मणवाद को बचाने आ जाता है और वह आवाज़ हमेशा के लिये खामोश कर दी जाती है।* *यदि भारत में ब्राह्मण शासन व ब्राह्मण राज़ कायम है तो उसका जिम्मेदार केवल और केवल OBC है क्योंकि बिना OBC सपोर्ट के ब्राह्मण यहाँ कुछ नही कर सकता।* *OBC को यह मालूम ही नही कि उसका किस तरह ब्राह्मण उपयोग कर रहा है, साथ ही साथ ST-SC व अल्पसंख्यक लोगों में मूल इतिहास के प्रति अज्ञानता व उनके अन्दर समाया पाखण्ड अंधविश्वास भी कम जिम्मेदार नही है।* *ब्राह्मणों ने आज हिन्दू मुसलमान समस्या देश में इसलिये खड़ी की है कि तथाकथित हिन्दू (OBC,ST,SC) अपने ही धर्म परिवर्तित भाई मुसलमान,ईसाई से लड़ें,मरें क्योंकि दोनों ओर कोई भी मरे फायदा ब्राह्मणों को ही हैं।* *क्या कभी आपने सुना है कि किसी दंगे में कोई ब्राह्मण मरा हो ? जहर घोलनें वाले कभी जहर नहीं पीते हैं।*
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प०राम प्रसाद बिस्मिल जी हज़रो नमन: *“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” : कब और कैसे लिखा राम प्रसाद बिस्मिल ने यह गीत!* राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ का नाम कौन नहीं जानता। बिस्मिल, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दे दी। वे मैनपुरी षडयंत्र व काकोरी-कांड जैसी कई घटनाओं मे शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सदस्य भी थे। भारत की आजादी की नींव रखने वाले राम प्रसाद जितने वीर, स्वतंत्रता सेनानी थे उतने ही भावुक कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार व साहित्यकार भी थे। बिस्मिल उनका उर्दू उपनाम था जिसका हिन्दी में अर्थ होता है ‘गहरी चोट खाया हुआ व्यक्ति’। बिस्मिल के अलावा वे राम और अज्ञात के नाम से भी लेख व कवितायें लिखते थे। *राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ की तरह अशफ़ाक उल्ला खाँ भी बहुत अच्छे शायर थे। एक रोज का वाकया है अशफ़ाक, आर्य समाज मन्दिर शाहजहाँपुर में बिस्मिल के पास किसी काम से गये। संयोग से उस समय अशफ़ाक जिगर मुरादाबादी की यह गजल गुनगुना रहे थे* “कौन जाने ये तमन्ना इश्क की मंजिल में है। जो तमन्ना दिल से निकली फिर जो देखा दिल में है।।” बिस्मिल यह शेर सुनकर मुस्करा दिये तो अशफ़ाक ने पूछ ही लिया- “क्यों राम भाई! मैंने मिसरा कुछ गलत कह दिया क्या?” इस पर बिस्मिल ने जबाब दिया- “नहीं मेरे कृष्ण कन्हैया! यह बात नहीं। मैं जिगर साहब की बहुत इज्जत करता हूँ मगर उन्होंने मिर्ज़ा गालिब की पुरानी जमीन पर घिसा पिटा शेर कहकर कौन-सा बड़ा तीर मार लिया। कोई नयी रंगत देते तो मैं भी इरशाद कहता।” अशफ़ाक को बिस्मिल की यह बात जँची नहीं; उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा- “तो राम भाई! अब आप ही इसमें गिरह लगाइये, मैं मान जाऊँगा आपकी सोच जिगर और मिर्ज़ा गालिब से भी परले दर्जे की है।” *उसी वक्त पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने यह शेर कहा* “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-कातिल में है?” यह सुनते ही अशफ़ाक उछल पड़े और बिस्मिल को गले लगा के बोले- “राम भाई! मान गये; आप तो उस्तादों के भी उस्ताद हैं।” आगे जाकर बिस्मिल की यह गज़ल सभी क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की गाड़ी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढ़ाते हुए और अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए एक साथ गाया करते थे। बिस्मिल की शहादत के बाद उनका यह गीत क्रान्तिकारियों के लिए मंत्र बन गया था। न जाने कितने क्रांतिकारी इसे गाते हुए हँसते-हँसते फांसी पर चढ़ गए थे। पढ़िए राम प्रसाद बिस्मिल द्वारा लिखा गया देशभक्ति से ओतप्रोत यह गीत – सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ! हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है? एक से करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है। रहबरे-राहे-मुहब्बत! रह न जाना राह में, लज्जते-सेहरा-नवर्दी दूरि-ए-मंजिल में है। अब न अगले वल्वले हैं और न अरमानों की भीड़, एक मिट जाने की हसरत अब दिले-‘बिस्मिल’ में है । ए शहीद-ए-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफ़िल में है। खींच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद, आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? है लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर, और हम तैयार हैं सीना लिये अपना इधर। खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हाथ जिनमें हो जुनूँ , कटते नही तलवार से, सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से, और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है , सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हम तो निकले ही थे घर से बाँधकर सर पे कफ़न, जाँ हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम। जिन्दगी तो अपनी महमाँ मौत की महफ़िल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। यूँ खड़ा मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार, “क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?” सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है? दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब, होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज। दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है! सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। जिस्म वो क्या जिस्म है जिसमें न हो खूने-जुनूँ, क्या वो तूफाँ से लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है। पं० राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ उनके इस लोकप्रिय गीत के अलावा ग्यारह वर्ष के क्रान्तिकारी जीवन में बिस्मिल ने कई पुस्तकें भी लिखीं। जिनमें से ग्यारह पुस्तकें ही उनके जीवन काल में प्रकाशित हो सकीं। ब्रिटिश राज में उन सभी पुस्तकों को ज़ब्त कर लिया गया था। पर स्वतंत्र भारत में काफी खोज-बीन के पश्चात् उनकी लिखी हुई प्रामाणिक पुस्तकें इस समय पुस्तकालयों में उपलब्ध हैं। 16 दिसम्बर 1927 को बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा का आखिरी अध्याय (अन्तिम समय की बातें) पूर्ण करके जेल से बाहर भिजवा दिया। 18 दिसम्बर 1927 को माता-पिता से अन्तिम मुलाकात की और सोमवार 19 दिसम्बर 1927 को सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर गोरखपुर की जिला जेल में उन्हें फाँसी दे दी गयी। राम प्रसाद बिस्मिल और उनके जैसे लाखो क्रांतिकारियों के बलिदान का देश सद्येव ऋणी रहेगा! जय हिन्द !
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हैप्पी दीपावली पर्व: लखनऊ,आज का दिन हमारे पौत्र असद अली,अशर अली पुत्र शबाब अली एवं गौहर अली पुत्र शादाब अली व आरिज़ अली पुत्र नौशाद अली के नाम दोस्तो ! *मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की वनवास पूरा कर एवं रावण का वध कर अयोध्या वापसी की ख़ुशी में मनाये जाने वाले पंचदिवसीय समृद्धिपर्व दीपावली की सभी भारती देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ* ❤💐❤ नायाब अली लखनवी (सम्पादक) *नायाब टाइम्स* "परिवारगण" "उत्तर प्रदेश" लखनऊ (भारत)
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यार: यारो के यार डॉ०एन०के०श्रीवास्तव "आज का दिन 2004 की दोस्ती के नाम मृत्यु लोक पे जिओ सालो साल ये रब से दुआ है दोस्त...!" Wishing you all a Merry Christmas🎅🏻 in adv.... !
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